भारतीय ग्रामोत्थान संस्था द्वारा टिहरी गढ़वाल में उत्तराखंड महिला समेकित विकास योजना के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

उत्तराखंड महिला एवं बाल विकास समिति, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखंड के अंतर्गत संचालित उत्तराखंड महिला समेकित विकास योजना के तहत 14 सितंबर 2026 को टिहरी गढ़वाल के ढालवाला स्थित पहाड़ी क्राफ्ट परिसर में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को योजना से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रेरित करना रहा।


कार्यक्रम का आयोजन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, ढालवाला (ऋषिकेश), टिहरी गढ़वाल द्वारा किया गया। संस्था द्वारा लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और स्थानीय संसाधनों पर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में महिलाओं को उत्तराखंड महिला समेकित विकास योजना के उद्देश्यों और इसके माध्यम से उपलब्ध संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।


कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित स्थानीय गतिविधियों से जोड़ने, उनके पारंपरिक हुनर एवं कौशल को विकसित करने तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों और महिलाओं के हुनर का सही तरीके से उपयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। साथ ही महिलाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के राज्य मंत्री (हथकरघा एवं हस्तशिल्प विभाग) श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल जी उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को संबोधित करते हुए उनके हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी और उनके कौशल को बढ़ावा देकर उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर महिलाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों को प्रोत्साहित करने तथा उनके उत्पादों और हुनर को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।


मुख्य अतिथि ने कहा कि हथकरघा, हस्तशिल्प और स्थानीय संसाधनों से जुड़े कार्य न केवल हमारी पारंपरिक विरासत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा करते हैं। महिलाओं को इन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने भी महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया। प्रतिभागियों का कहना रहा कि योजनाओं की जानकारी सीधे महिलाओं तक पहुंचने से उन्हें उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलती है। इस तरह के कार्यक्रम महिलाओं को अपने हुनर को पहचानने और उसे आजीविका के साधन में बदलने के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम में गीता चन्दोला, अध्यक्ष भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, सीमा गोयल, एनआरआई, संगीत गोयल, CDPO, अनिल चंदोला, BGS प्रभारी, सीमा सुपरवाइजर, निर्मला सुपरवाइजर, विमला नेगी, बी.जी.एस. कोषाध्यक्ष, बीना पुंडीर, मास्टर ट्रेनर तथा नरेन्द्र प्रसाद कुकशाल, संचालक सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें अपने पारंपरिक कौशल, स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा दी जा सकती है।

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