बहु चर्चित निठारी कांड वाले सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मामले को लेकर पुलिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। पुलिस का कहना है कि सुरेंद्र कोली की मौत फांसी लगने से दम घुटने के बाद हुई। पुलिस के मुताबिक, जब टीम मौके पर पहुंची थी तब कोली के नाक-मुंह से खून निकल रहा था। पुलिस ने इसके पीछे की वजह भी बताई है।
हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में सुरेंद्र कोली 18 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। हरिद्वार पुलिस ने सुरेंद्र कोली की मौत के पीछे की वजह का खुलासा किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत की प्रमुख वजह गले में फंदा फंसने के कारण दम घुटने के कारण हुई। हालांकि जब पुलिस ने उसका मृत शरीर देखा तो वह जमीन में था और रस्सी टूटी हुई थी।
नाक-मुंह से खून पर पुलिस ने क्या कहा
पुलिस के मुताबिक, कोली ने जब रस्सी ने फांसी लगाई तो उसकी 90 फीसदी मौत गले में फंदा फंसने से हो चुकी थी, बाकी वह रस्सी टूटने के कारण जमीन में गिरने से मरा। प्रत्यक्षदर्शियों ने नाक से खून निकलने को लेकर सुरेंद्र कोली की मौत पर हत्या का अंदेशा जताया था। इस पर पुलिस का कहना है कि कई बार सुसाइड के बाद खून का प्रेशर बनने से नाक और मुंह से खून निकलना स्वाभाविक है। पुलिस के मुताबिक, सुरेंद्र कोली की मौत फांसी लगाने से हुई।
नाम बदलकर हरिद्वार में रह रहा था
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र कोली कुछ महीने पहले ही हरिद्वार आया था। वह मूल रूप से अल्मोड़ा के गांव मंगरुखाल का रहने वाला था। उसके दो भाई और हैं, एक भाई दिल्ली में जॉब करता है तो दूसरा अल्मोड़ा में शिक्षक है। वह हरिद्वार में सदाराम नाम से रह रहा था। कुछ महीने पहले उसने हरिद्वार के रोशनाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की थी, चार दिन पहले ही वह मंदिर के सामने किराए पर चाय की दुकान चला रहा था।
आत्महत्या पर उठे थे सवाल
बता दें कि सुरेंद्र कोली की मौत पर निठारी कांड के पीड़ित और कोली के परिजनों ने सवाल उठाए थे। निठारी कांड में पीड़ित झब्बू लाल ने दावा किया था कि सुरेंद्र कोली की हत्या की गई है। उसकी मौत आत्महत्या के कारण नहीं हुई। उनकी 15 वर्षीय बेटी 2005 की गर्मियों में लापता हो गई थी और बाद में उसका नोएडा के सेक्टर 31 स्थित बंगले के पीछे से कंकाल मिला था।
कई बच्चों और महिलाओं के गायब होने और उनकी हत्याओं का पता चलने के बाद इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था।
झब्बू लाल ने सवाल उठाया था कि जेल से रिहा होने के बाद कई महीने बाहर बिताने के बाद कोली ऐसा कदम क्यों उठाएगा। उन्होंने कहा, “अगर उसने जेल में आत्महत्या की होती, तो समझा जा सकता था कि वह अवसाद में था। लेकिन जेल से रिहा होने और कई महीने बाहर बिताने के बाद उसने अपनी जान ले ली? इससे सवाल उठते हैं।”

