उत्तराखंड के किच्छा में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहनाइयों की गूंज के बीच पुलिस और एनजीओ की टीम ने दस्तक दी। मामला बाल विवाह का था, जहां एक 15 साल की मासूम किशोरी को 27 साल के युवक के साथ शादी के बंधन में बांधा जा रहा था। जब परिजनों से उम्र के दस्तावेज मांगे गए तो वे आनाकानी करने लगे, लेकिन स्कूल के रिकॉर्ड्स ने सारा सच उगल दिया। प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बारात को वापस लौटा दिया और किशोरी को सुरक्षित कस्टडी में ले लिया।
अंजनिया गांव में सोमवार रात एक एनजीओ की पहल पर पुलिस ने नाबालिग लड़की की शादी रुकवाई। प्रमाणपत्रों की जांच में लड़की के नाबालिग होने का खुलासा होने के बाद बारात को लौटना पड़ा।
दोनों पक्षों के परिजनों को काउंसलिंग के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया है। सोमवार रात्रि स्वयंसेवी संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल डेवलपमेंट (आईएसडी) को सूचना मिली कि ग्राम अंजनिया में 15 वर्षीय किशोरी का हरियाणा के 27 वर्षीय युवक से विवाह किया जा रहा है।
आईएसडी परियोजना निदेशक बिन्दुवासिनी पुलिस को लेकर ग्राम अंजनिया पहुंचीं। आईएसडी टीम को परिजनों से किशोरी का आधार कार्ड नहीं मिला। जूनियर हाईस्कूल के दस्तावेजों में किशोरी की उम्र 15 वर्ष 11 महीने पाई गई। आईएसडी के अध्यक्ष डॉ़ अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नाबालिग को वन स्टॉप सेंटर में दाखिल कराया गया है।

