द्रोण महोत्सव 2026 का छठा दिन: लोक संस्कृति की गूंज और बढ़ती रौनक

देहरादून। सहस्त्रधारा / आई.टी. पार्क रोड पर चल रहे द्रोण महोत्सव 2026 के छठे दिन आयोजन स्थल पर अलग ही उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। दिन ढलते ही मेले का पूरा परिसर रंगीन लाइटों से जगमगा उठा और प्रवेश द्वार से लेकर स्टॉलों तक दर्शकों की आवाजाही लगातार बनी रही।

इस दस दिवसीय महोत्सव का आयोजन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण उत्पादों को एक सशक्त बाजार उपलब्ध कराना है। छठे दिन हस्तनिर्मित कालीन, ऊनी वस्त्र, प्राकृतिक रेशों से बने बैग व घरेलू सजावटी सामान की दुकानों पर लोगों की खास रुचि देखी गई।

कई आगंतुकों ने स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और कारीगरी की खुलकर सराहना की।
खाद्य उत्पादों के स्टॉल भी लोगों को आकर्षित करते रहे। पहाड़ी दालें, पारंपरिक अचार और अन्य स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के लिए शाम के समय अच्छी भीड़ उमड़ी। परिवारों और युवाओं की मौजूदगी ने मेले को जीवंत बना दिया।


छठे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा। मंच पर प्रस्तुत लोक नृत्य, लोक गीत और पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। संस्कृति कार्यक्रम के दौरान दर्शक झूमते नजर आए और पूरे जोश के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया। तालियों की गूंज और उत्साह ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।


आयोजकों का कहना है कि आगामी दिनों में और भी विशेष प्रस्तुतियां और आकर्षण जोड़े जाएंगे, जिससे द्रोण महोत्सव का उत्साह और बढ़ेगा।
छठे दिन की उमंग ने यह साबित कर दिया कि द्रोण महोत्सव केवल व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं का उत्सव है।

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