
मंडुवाला स्थित Dolphin (PG) Institute of Biomedical and Natural Sciences में मंगलवार को तीन दिवसीय ‘क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन सह जागरूकता कार्यक्रम’ का भव्य शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम Ministry of Textiles के अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से Rishikesh Natural Fiber Handicrafts Producer Company Limited द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देना तथा स्थानीय कारीगरों को उद्यमिता और आधुनिक बाजार से जोड़ना है। तीन दिनों तक चलने वाला यह कार्यक्रम 10 से 12 मार्च तक आयोजित होगा, जिसमें राज्य के कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉल्फिन इंस्टीट्यूट की प्राचार्या डॉ. शैलजा पंत उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम कारीगरों को उद्यमशीलता कौशल से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री नलिन राय, सहायक निदेशक, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने भी भाग लिया। उन्होंने सरकारी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को मिलने वाले लाभों की जानकारी दी और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से शिल्पकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिल सकती है।

इस अवसर पर वीरेन्द्र दत्त सेमवाल, उपाध्यक्ष उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प कला हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इसे संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।
संस्थान के निदेशक टी. के. नागपाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं स्थानीय कारीगरों को नई तकनीक, डिजाइन और विपणन की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं।

कार्यक्रम में विशेष रूप से भीमल क्राफ्ट और प्राकृतिक फाइबर आधारित हस्तशिल्प पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें लगभग 20 कारीगर भाग ले रहे हैं, जिन्हें चार अनुभवी संसाधन व्यक्तियों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें विमला नेगी, विमला चौहान, बसंती रावत और ममता नेगी शामिल हैं, जो हस्तशिल्प और हथकरघा कला के क्षेत्र में अनुभव रखती हैं।

कार्यक्रम के दौरान इंटरैक्टिव सत्र, प्रायोगिक कार्यशालाएं और उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में उत्पाद निर्माण, डिजाइन नवाचार और बाजार से जुड़ने के तरीकों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के सफल संचालन में अपर निदेशक (प्रशासन) सुनील कौल, डीन अकादमिक प्रो. ज्ञानेंद्र अवस्थी, डीन रिसर्च प्रो. प्रताप चौहान, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सुधीर भारती तथा आरएनएचएफपीसीएल के निदेशक अनिल चंदोला का विशेष सहयोग रहा। इसके अलावा डॉ. श्रुति शर्मा, विपुल गर्ग और डॉ. आशीष रूड़ी ने भी आयोजन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजकों के अनुसार यह पहल न केवल हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देगी, बल्कि उत्तराखंड की महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
