मध्य-पूर्व में चल रही जंग की वजह से शुरू हुई गैस किल्लत को नियंत्रित करने को गैस कंपनियों ने फिर से बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत दो सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं की गैस की बुकिंग अब 35 दिन बाद होगी। इससे पहले ऐसे उपभोक्ताओं की गैस 30 दिन में बुक हो रही थी। यह बदलाव बुधवार से लागू हो जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है।
गैस वितरक संघ के अध्यक्ष भारतीश मिश्रा ने बताया कि एक सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग 25 दिन बाद, ग्रामीण इलाकों व उज्ज्वला योजना वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग 45 दिन बाद होगी। नए बदलाव को सिस्टम में फीड किया जा रहा है। अब नई व्यवस्था के अंतर्गत ही गैस सिलेंडर बुक होगा। जिला आपूर्ति अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि गैस की कमी को देखते हुए गैस कंपनियों ने बदलाव किया है। जिले के लोग परेशान न हों। उनको हर हाल में गैस दिलाई जाएगी। जरूरत को देखते हुए ही गैस को बुक करें। अनावश्यक बुकिंग से बचें।
डिमांड पर मिलेगी गैस
कानपुर में कॉमर्शियल सिलेंडर मिलने के दावे फिलहाल मंगलवार को हवा हवाई साबित हुए है। मंगलवार को आपूर्ति नहीं हो सकी है। अब 20 फीसदी होटल व रेस्टोरेंट की आपूर्ति को लेकर सप्लाई बुधवार से होने की उम्मीद है। इसके लिए होटल व रेस्टोरेंट संचालकों को अपनी लिखित डिमांड गैस एजेंसी व आपूर्ति विभाग को देनी होगी।
इस मामले में जिला पूर्ति अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि शनिवार व रविवार को प्लांट बंद होने की वजह से गैस लोड आ नहीं सका है। इसलिए दिक्कत हो गई है। मानीटरिंग की जा रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को गैस सिलेंडर मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश-जिला स्तर पर गैस निगरानी कमेटी गठित
रसोई गैस व सीएनजी की आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार ने प्रदेश और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियां गठित करने के आदेश दिए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति बनेगी, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व तेल कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। वहीं, जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी में पुलिस, नगर निकाय, परिवहन, पूर्ति विभाग और गैस कंपनियों के अधिकारी रहेंगे। दोनों कमेटियां नियमित बैठक कर गैस आपूर्ति की निगरानी करेंगी।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार को इस संबंध में भेजे गए निर्देश के क्रम में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली जो राज्य स्तरीय कमेटी गठित की गई है उसमें नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव या प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, परिवहन विभाग, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, राजस्व विभाग तथा खाद्य एवं रसद विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के साथ-साथ खाद्य एवं रसद आयुक्त, इन्वेस्ट यूपी के सीईओ, निदेशक स्थानीय निकाय तथा भारतीय तेल उद्योग, पीएनजी आरबीके राज्य स्तरीय समन्वयक सदस्य होंगे।

