उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना (UMSVY) के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से 14 दिवसीय बेसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डागर, नरेंद्र नगर में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 सितम्बर 2026 से 06 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, ढालवाला (ऋषिकेश) द्वारा किया जा रहा है, जबकि इसका प्रायोजन उत्तराखण्ड महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किया जा रहा है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं स्थानीय महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) का प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को हस्तशिल्प निर्माण की विभिन्न तकनीकों, उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन विकास, विपणन तथा लघु उद्यम स्थापित करने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के कौशल विकास के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर ग्राम प्रधान डागर दिलीप सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य संदीप पुंडीर, जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि नीरज गडिया, मास्टर ट्रेनर पूर्णिमा पंवार, भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला तथा उत्तराखण्ड शिल्प रत्न पुरस्कार से सम्मानित बीना पुंडीर विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में क्षेत्र की अनेक महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा जब महिलाएं अपने कौशल का उपयोग कर स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और उचित प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं अपने उत्पादों को स्थानीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के बाजार तक पहुंचा सकती हैं।
जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि नीरज गडिया ने महिलाओं को सरकारी योजनाओं और उद्यमिता विकास से संबंधित जानकारी देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वयं सहायता समूहों एवं लघु उद्योगों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकती हैं। वहीं मास्टर ट्रेनर पूर्णिमा पंवार ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण की रूपरेखा से अवगत कराया और बताया कि आगामी 14 दिनों में उन्हें हस्तशिल्प निर्माण से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।उत्तराखण्ड शिल्प रत्न सम्मान से सम्मानित बीना पुंडीर ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि लगन और मेहनत के साथ कौशल का विकास किया जाए तो हस्तशिल्प के क्षेत्र में बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला ने कहा कि संस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और वे प्रशिक्षण के पश्चात अपने कौशल का उपयोग कर स्वरोजगार के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी गईं।इस 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से क्षेत्र की महिलाओं को न केवल नया कौशल सीखने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम भी बढ़ा सकेंगी। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित होने की उम्मीद है।





