24 दिन तो हो गए, सोनम वांगचुक कब तक करेंगे अनशन; इस्तीफा छोड़ अब उनकी 2 शर्तें क्या

नीट पेपर लीक की वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अन्न त्यागे 24 दिन हो चुके हैं। 28 जून से ही भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो मार्च’ के बाद अनशन खत्म करने का ऐलान कर चुके थे। दोपहर तक मीडिया में ऐसी खबरें भी चलने लगीं कि शनिवार से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है, लेकिन शाम तक उनका रुख बदल गया। वांगचुक ने दो नई शर्तों के साथ अनशन जारी रखने का ऐलान कर दिया।

ऐसे में सवाल उठता है कि सोनम वांगुचक कब तक अनशन पर डटे रहेंगे। वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से लिखे लेटर में उन्होंने दो नई शर्तों का जिक्र किया है। उनका कहना है कि जब तक इसमें से किसी एक मांग को पूरा नहीं किया जाता है, वह अनशन जारी रखेंगे। सोनम ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ बर्बरता की और इसलिए अनशन को जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने दो शर्तों रखते हुए बताया कि जब तक इनमें से किसी एक को पूरा नहीं किया जाता है, वह अन्न नहीं खाएंगे।

क्या दो शर्तें, प्रधान का इस्तीफा नहीं

सोनम वांगचुक ने इस लेटर में कहा था कि वह तब तक अनशन करते रहेंगे जब तक युवा नेताओं (सीजेपी के नेताओं) को संसद भवन में सांसदों से नहीं मिलने दिया जाता है। उन्होंने दूसरा विकल्प यह बताया कि उन्हें अस्पताल में मुलाकात का मौका दिया जाए। उन्होंने यह उम्मीद भी जाहिर की कि सरकार शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी। हालांकि, इसमें भी उन्होंने साफ तौर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं की है। इससे पहले भी वांगुचक ने जो तीन शर्तें तय की थीं, उनमें इस्तीफे का जिक्र नहीं था। इसे उनके रुख में नरमी के तौर पर भी देखा गया और यह तय माना जा रहा था कि वह अनशन खत्म कर देंगे। वांगचुक ने यह भी कहा था कि यदि संसद मार्च सफल रहा तो वह भूख हड़ताल खत्म कर सकते हैं।

सफदरजंग से शिफ्ट किए जाएंगे वांगचुक

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का मंगलवार को आदेश दिया। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की उस याचिका पर यह आदेश दिया, जिसमें एकल पीठ के रविवार के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने मेदांता अस्पताल के निदेशक को वांगचुक की लगातार देखभाल के लिए जरूरी विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर प्रोटोकॉल के अनुसार ही दवाएं देंगे और ‘अपीलकर्ता के पति’ को इसका पालन करना होगा।’ अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गीतांजलि आंग्मो को अपनी इच्छानुसार कभी भी वांगचुक से मिलने की अनुमति होगी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किए जाने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।

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