रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने IMF से पाकिस्तान को दिए गए \$1 बिलियन के ऋण पर पुनर्विचार की मांग की, आतंकवाद के वित्तपोषण का जताया खतरा

भुज: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से पाकिस्तान को दिए गए $1 बिलियन के राहत पैकेज पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस राशि का एक बड़ा हिस्सा आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

भुज एयर फोर्स स्टेशन पर सैन्यकर्मियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत चाहता है कि IMF अपने फैसले पर पुनर्विचार करे क्योंकि मुझे पूरा विश्वास है कि पाकिस्तान इस राशि का एक बड़ा हिस्सा आतंकवादी ढांचे को मजबूत करने में खर्च करेगा। यह एक प्रकार से आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सहायता देने जैसा है।”

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह IMF ने आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को विस्तारित वित्तीय सुविधा (EFF) के तहत यह सहायता दी थी। यह निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौते से ठीक पहले लिया गया था, जिसे अमेरिका ने मध्यस्थता कर करवाया था।

रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भुज एयर फोर्स स्टेशन उन सैन्य ठिकानों में से एक था, जिसे पाकिस्तान की ओर से मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया था, लेकिन भारतीय वायुसेना की मजबूत एयर डिफेंस प्रणाली ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

यह दौरा “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद उनका दूसरा सैन्य अड्डा दौरा था, जिसमें 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया था।

गुरुवार को श्रीनगर के बडामी बाग छावनी में जवानों से मिलने के बाद राजनाथ सिंह ने दोहराया कि आतंकवाद के प्रति भारत की ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति उसकी रक्षा रणनीति की मूल भावना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकी संगठनों के ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर चुकी है। उन्होंने कहा, “IMF से मिलने वाले \$1 बिलियन का एक बड़ा हिस्सा मुरिदके और बहावलपुर स्थित इन संगठनों के मुख्यालयों पर खर्च किया जाएगा। क्या यह IMF द्वारा आतंक को अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग करना नहीं माना जाएगा?”

बता दें कि मुरिदके लश्कर का गढ़ है जबकि बहावलपुर जैश का मुख्यालय है। हाल ही में पहलगाम हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसे लश्कर के आतंकवादियों ने अंजाम दिया था।

राजनाथ सिंह ने यह भी चिंता जताई कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकी तत्वों के हाथों में भी जा सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

 

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