महाशिवरात्रि 2026 कब है? जानें पूजा का शुभ समय और व्रत विधि

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था और इसी रात शिव और शक्ति का मिलन माना जाता है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं और रात भर जागरण करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है, मन की परेशानियां कम होती हैं और जीवन में अच्छे बदलाव आने लगते हैं। इस रात उपवास, रात्रि जागरण और शिव पूजा का खास महत्व माना जाता है। साल 2026 में भी देशभर में और विदेशों में रहने वाले भक्त महाशिवरात्रि को पूरे भाव के साथ मनाएंगे।

महाशिवरात्रि 2026 की तारीख और समय- महाशिवरात्रि 2026 रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी।

पूजा और व्रत के शुभ समय (भारतीय समय अनुसार):

निशिता काल पूजा: रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी की रात)

व्रत पारण (उपवास खोलने का समय): सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक (16 फरवरी)

रात्रि के चार प्रहर की पूजा का समय:

पहला प्रहर: शाम 6:11 से 9:23 बजे तक

दूसरा प्रहर: रात 9:23 से 12:35 बजे तक

तीसरा प्रहर: रात 12:35 से सुबह 3:47 बजे तक

चौथा प्रहर: सुबह 3:47 से 6:59 बजे तक

चतुर्दशी तिथि:

शुरुआत: 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे

समाप्ति: 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे

महाशिवरात्रि का महत्व-

महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए निशिता काल को पूजा के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। उत्तर भारत में इसे फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इसे माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी कहा जाता है। नाम अलग हो सकता है, लेकिन पर्व पूरे देश में एक ही दिन मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि व्रत विधि-

शिवरात्रि से एक दिन पहले (त्रयोदशी): इस दिन एक बार हल्का और सादा भोजन करें।

शिवरात्रि के दिन: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पास के शिव मंदिर में जाकर या घर पर शिव पूजा करें। पूरे दिन उपवास रखने का संकल्प लें।

शाम और रात की पूजा: शाम को दोबारा स्नान करें। रात में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, फल और धतूरा चढ़ाएं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। चाहें तो चारों प्रहर में पूजा कर सकते हैं।

व्रत पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलें। माना जाता है कि चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना ज्यादा शुभ होता है।

चार प्रहर की पूजा का महत्व- महाशिवरात्रि की रात को चार हिस्सों में बांटकर पूजा करने की परंपरा है। जो भक्त चारों प्रहर में पूजा करते हैं, उन्हें विशेष फल मिलने की मान्यता है। अगर पूरा संभव न हो तो निशिता काल में पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

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