अस्सी फिल्म रिलीज हो गई है। तापस्सी पन्नू एक ब्रेक के बाद बड़े पर्दे पर वापस आई हैं और वो भी डायरेक्टर अनुभव सिन्हा के साथ। अनुभव और तापसी ने इससे पहले फिल्म थप्पड़ में काम किया था। अब अगर आप भी फिल्म देखने का प्लान कर रहे हैं तो पहले पढ़ें फिल्म का पूरा रिव्यू कि कैसी है मूवी।
फिल्म की कहानी परिमा(कनी कुसरुति) पर है जो एक टीचर है। फिल्म में वह दिल्ली में अपने पति के साथ रहती है। एक शाम उसे कुछ यंग लड़के किडमैप करके उसके साथ सेक्शुअली असॉल्ट करते हैं। लेकिन उसके बाद जो पुलिस इन्वेस्टिगेशन और कोर्ट की सुनवाई में जो होता है वही इसमें दिखाया गया है।
रिव्यू
पहले फ्रेम से, अस्सी आपका ध्यान अट्रैक्ट करती है, लेकिन यह देखना भी आसान नहीं है। फिल्म की कहानी हर 20 मिनट में याद दिलाती है कि देश में कहीं न कहीं बलात्कार की घटना घटी है। सेकेंड हाफ से थोड़ी सी कहानी लूज होती है। बलात्कार पीड़िता से समाज द्वारा दूरी बनाने के हर पॉसिबल तरीके को कवर करने के चक्कर में, फिल्म अपने पैटर्न से फिसलने लगती है। जैसे एक सीन होता है जहां स्कूल की प्रिंसिपल(सीमा पाहवा) परिमा को इन्फॉर्म करती है कि वह टीचर के तौर पर नहीं का काम कर सकतीं क्योंकि स्कूल का रिजल्ट बेस्ट आया है पर पूरा स्कूल फेल हो गया है।
वह यह भी कहती हैं कि 9वीं क्लास के बच्चों ने भी उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न का मजाक उड़ाया है और इसी वजह से उन्हें स्कूल में नहीं रखा जा सकता।
परफॉर्मेंस
परफॉर्मेंस की बात करें तो कनी कुसरुति ने रेप सर्वाइवर का किरदार काफी अच्छे से निभाया है। वह न तो अपने पिच को बहुत ऊंचा होने देती है और न ही उसे ऐसी टेरिट्री में ले जाती है जहां दर्शकों की भावनाओं का शोषण किया जाए।
तापसी पन्नू ने बतौर वकील सॉलिड परफॉर्मेंस दी है। मनोज पाहवा ने आरोपी के पिता की भूमिका निभाई है और उन्होंने हमेशा की तरह शानदार काम कर दिखाया है। जीशान अय्यूब ने परिमा के पति का शांत लेकिन एफेक्टिव काम किया है। रेवती ने जज के तौर पर पावरफुल परफॉर्मेंस दी है।
ओवरऑल
अस्सी एक कम्फर्टेबल फिल्म नहीं है और ना इसे ऐसा बनाने की कोशिश की गई है। यह एक ऐसी चोट लगाती है जिसका जख्म भरता नहीं है और वे भी चाहते हैं कि लोगों के मन से ये महत्वपूर्ण और सेंसिटिव टॉपिक हटना नहीं चाहिए।

