
प्राकृतिक रेशों से तैयार बैग, गृह सज्जा सामग्री, हस्तनिर्मित उपयोगी वस्तुएं और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद आगंतुकों को खूब पसंद आए। बांस (Bamboo) से बने फर्नीचर, डेकोरेटिव आइटम और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं। कारीगरों ने बताया कि इको-फ्रेंडली उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
महोत्सव में Tribes India का स्टॉल भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां जनजातीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। इसके अलावा आयुष विभाग और होम्योपैथिक विभाग के स्टॉलों पर निःशुल्क परामर्श एवं दवा वितरण की सुविधा उपलब्ध है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में लोग उठा रहे हैं।
पहाड़ी स्वाद भी इस महोत्सव की खास पहचान बना हुआ है। यहां पहाड़ी दालों, स्थानीय अनाज, पारंपरिक अचार और घरेलू उत्पादों की दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को लोगों ने सराहा।
इस पूरे आयोजन का संचालन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था (BGS) द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण एवं पारंपरिक उत्पादों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है।
द्रोण महोत्सव 13 से 22 फरवरी तक जारी रहेगा। आयोजकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर स्थानीय और प्राकृतिक उत्पादों को समर्थन दें तथा इस सांस्कृतिक एवं आर्थिक उत्सव का हिस्सा बनें।
चौथे दिन की रौनक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि द्रोण महोत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की परंपरा, प्रकृति और स्थानीय स्वावलंबन का उत्सव है।
