जंगलों को वनाग्नि से बचाने के लिए नैनीताल वन प्रभाग ने एक महत्वपूर्ण योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रभाग के अंतर्गत आने वाली 440 किलोमीटर लंबी फायर लाइन को साफ करने के लिए इसके दायरे में आने वाले करीब 10 हजार पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आग लगने की स्थिति में उसे जंगल के भीतर एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलने से रोकना है।
फायर लाइन जंगल को आग से कैसे बचाती
नैनीताल वन प्रभाग करीब 60 हजार हेक्टेयर में फैला है और आठ रेंजों में बंटा है। गर्मियों में इन इलाकों में चीड़ की पत्तियों (पिरूल) और जंगल में नमी खत्म होने से आग तेजी से फैलती है। फायर लाइन वह खाली पट्टी होती है जो जंगल के बीच में बनाई जाती है ताकि आग को आगे बढ़ने के लिए ईंधन न मिल सके।
फायर लाइन पर पेड़ों की कटाई की प्लानिंग चालू
लंबे समय से इन लाइनों पर नए पेड़ उग आने के कारण इनकी प्रभावशीलता खत्म हो गई थी। वन विभाग ने इस अभियान के पहले चरण में फायर लाइन पर खड़े पेड़ों की 47 लॉट तैयार कर ली हैं। वर्तमान में पेड़ों को चिह्नित कर 12 लॉट कटान के लिए वन निगम को सौंप दी गई हैं।
विशेषज्ञों ने बताया है इसे वैज्ञानिक तरीका
फायर लाइन जंगलों को आग से बचाने का एक प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका है। यह जंगल के बीच बनाई गई एक खाली पट्टी होती है, जहां पेड़-पौधे, सूखी पत्तियां और झाड़ियां हटा दी जाती हैं ताकि आग को आगे बढ़ने के लिए ईंधन न मिले। खासकर गर्मियों में, जब नमी कम हो जाती है और चीड़ जैसी प्रजातियों की सूखी पत्तियां तेजी से आग फैलाती हैं, तब फायर लाइन आग को सीमित क्षेत्र में रोकने में अहम भूमिका निभाती है।
भारत में पहले भी हो चुकी है ऐसे कटाई
भारत में यह तरीका नया नहीं है। Forest Survey of India और विभिन्न राज्य वन विभाग वर्षों से उत्तराखंड, हिमाचल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में फायर लाइन का इस्तेमाल करते रहे हैं। हर साल फायर सीजन से पहले इन लाइनों की सफाई और चौड़ीकरण किया जाता है, ताकि वनाग्नि को फैलने से रोका जा सके और समय रहते उस पर काबू पाया जा सके।

