आपको शाहरुख खान की फिल्म स्वदेश का वह दृश्य तो याद ही होगा, जब बिजली आने पर पूरा गांव झूम उठता है और एक बुजुर्ग महिला की आंखों में खुशी के आंसू छलक आते हैं। कुछ ऐसा ही फिल्मी और भावुक कर देने वाला नजारा भारत-नेपाल सीमा पर स्थित थपलियालखेड़ा गांव में हकीकत बनकर सामने आया है। आजादी के सात दशकों से भी अधिक समय बाद इस सीमावर्ती भारतीय गांव में पहली बार बिजली का बल्ब जला है। जिससे पूरा गांव रोशन हो गया है। गांव में कुल 140 लोग रहते हैं, जिसमें 42 परिवार हैं। यह गांव उत्तराखंड के टनकपुर में स्थित है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के अधिशासी अभियंता विजय सकारिया ने बताया कि गांव में बुनियादी ढांचा तैयार कर पहली खेप में 36 बिजली कनेक्शनों को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। शेष दो चार परिवारों के भी घरों में सप्लाई दी जा रही है।
यह गांव उत्तराखंड के टनकपुर में स्थित है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के अधिशासी अभियंता विजय सकारिया ने बताया कि गांव में बुनियादी ढांचा तैयार कर पहली खेप में 36 बिजली कनेक्शनों को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। शेष दो चार परिवारों के भी घरों में सप्लाई दी जा रही है।
गांव की आबादी कुल 140, 42 परिवार
करीब 140 की आबादी वाले इस गांव में कुल 42 परिवार निवास करते हैं। अब तक यह गांव आधुनिक दुनिया की चकाचौंध से बिल्कुल कटा हुआ था। अपनी छोटी से छोटी जरूरतों के लिए ग्रामीणों को नेपाली बाजारों का रुख करना पड़ता है। इसके अलावा चम्पावत जिले के खिरद्वारी में भी 35 बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं।
अपने देश की चक्की का आटा तक नसीब नहीं
गांव में बिजली न होने के कारण थपलियालखेड़ा के लोगों को अपने ही देश की चक्की का पिसा आटा तक नसीब नहीं था। टनकपुर की दूरी पांच किमी होने से नेपाल के निकटवर्ती चक्की पर जाकर ग्रामीण जरूरतों को पूरा करते आते हैं।
