कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड में प्रशासन और पुलिस बल दोनों पूरी तरह से मुस्तैद है। इस बार से पहली बार कांवड़ मेले में सुरक्षा को लेकर साइबर कमांडो तैनात किए जाएंगे, जो सोशल मीडिया पर 24 घंटे निगरानी रखेंगे। भ्रामक, फर्जी और एआई जनरेटेड वीडियो की पहचान कर उन पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। कांवड़ के बाद साइबर कमांडो को कुंभ मेले में भी तैनात किया जाएगा। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने सोमवार को प्रेस क्लब में मीडिया को बताया कि 30 जुलाई से शुरू होने वाले कांवड़ मेले को सकुशल, शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए तैयारियां कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सेक्टरवार अधिकारियों की तैनाती की गई है। जहां भी व्यवस्थाओं में कमी मिलेगी, उसे तत्काल दूर कराया जाएगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को कांवड़ यात्रा से अलग रखा जाएगा, जबकि श्रद्धालु मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे मार्ग का उपयोग करेंगे। एसएसपी ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले भ्रामक, फर्जी अथवा समाज में भ्रम फैलाने वाले वीडियो पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सामान्य भ्रामक वीडियो पर 36 घंटे के भीतर कार्रवाई होगी, एआई जनरेटेड फर्जी वीडियो को तीन घंटे के भीतर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
स्टील कलशों से बदली कांवड़ यात्रा की चाल
कांवड़ यात्रा का स्वरूप हर साल बदल रहा है। इस बार स्टील के बड़े कलशों वाली कांवड़ ने यात्रा की टाइमिंग ही बदल दी है। पहले जहां अधिकांश शिवभक्त कांवड़ यात्रा पूरी करने में 10 से 13 दिन का समय लेते थे, वहीं अब स्टील के कलश और भारी कांवड़ के बढ़ते चलन के कारण यात्रा पूरी करने में 15 से 18 दिन लग रहे हैं। यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में कांवड़िए सावन शुरू होने से पहले ही हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल भरने लगे हैं।
हरिद्वार में इन दिनों सामान्य दिनों की तुलना में कांवड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से आए शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। पहले यात्रा के अंतिम दिनों में अधिक भीड़ देखने को मिलती थी, लेकिन इस बार यात्रा की शुरुआत में ही घाटों और प्रमुख मार्गों पर कांवड़ियों की अच्छी-खासी मौजूदगी दिखाई दे रही है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह स्टील के बड़े कलशों का बढ़ता उपयोग माना जा रहा है। अब कई श्रद्धालु स्टील के आकर्षक और बड़े कलशों वाली कांवड़ लेकर निकल रहे हैं। इनमें 100 से 200 लीटर तक गंगाजल भरा जा रहा है। भारी वजन के कारण यात्रा की गति धीमी हो जाती है और बीच-बीच में अधिक विश्राम करना पड़ता है। हरिद्वार पहुंचे रोहतक निवासी सोनू शर्मा ने बताया कि पहले उनकी कांवड़ यात्रा आठ से दस दिन में पूरी हो जाती थी, लेकिन अब स्टील के बड़े कलश के कारण 15 से 16 दिन लग जाते हैं। इसी वजह से इस बार वह पहले ही हरिद्वार पहुंच गए।
100 से 200 लीटर तक गंगाजल ले जा रहे श्रद्धालु
स्टील के बड़े कलशों का चलन तेजी से बढ़ने के साथ कई श्रद्धालु 100 से 200 लीटर तक गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। वहीं सामान्य कलश वाली कांवड़ में पांच से 50 लीटर तक गंगाजल भरा जा रहा है। भारी वजन के कारण यात्रा की गति धीमी हो रही है और श्रद्धालुओं को अधिक विश्राम करना पड़ रहा है। यही वजह है कि यात्रा पूरी करने में अब पहले की तुलना में कई दिन अधिक लग रहे हैं।
कांवड़ मेला स्वास्थ्य शिविरों में 260 कर्मचारी संभालेंगे मोर्चा
कांवड़ मेले में लाखों श्रद्धालुओं की सेहत की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के 260 स्वास्थ्यकर्मी संभालेंगे। विभाग ने 27 सरकारी स्वास्थ्य शिविरों में 72 चिकित्सकों, 68 फार्मासिस्टों और 120 अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की है। सोमवार से कांवड़ कंट्रोल रूम के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को ड्यूटी स्थल आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। कांवड़ मेले को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

