उत्तराखंड के सबसे बड़े अस्पताल दून अस्पताल की इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टरों की लापरवाही और ऑन कॉल न पहुंचने का रवैया अब भी बरकरार है। सोमवार देर शाम एक गंभीर रूप से घायल युवक को जब अस्पताल लाया गया, तो कई विभागों के सीनियर डॉक्टर नहीं पहुंचे। ऐसे में जूनियर डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला और इमरजेंसी में ही सर्जरी कर मरीज की जान बचाई। दरअसल, विकासनगर के छरबा निवासी युवक राजू के ऊपर सोमवार को एक भारी पत्थर गिर गया था। हादसे में उसके चेहरे, सिर, आंख, जबड़े और नाक पर गंभीर चोटें आईं। उसका सिर और जबड़ा बुरी तरह से फट गया था। आनन-फानन में उसे दून अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया।
फोटो खींचकर चले गए डॉक्टर, न्यूरो से कोई नहीं आया
इस गंभीर मामले में लापरवाही की हद यह रही कि नेत्र रोग विभाग से जूनियर रेजिडेंट (जेआर) आए और मरीज की सिर्फ फोटो खींचकर चले गए। वहीं, न्यूरो सर्जरी विभाग से कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा।
इन डॉक्टरों की टीम ने किया ऑपरेशन
जब सीनियर डॉक्टर नहीं आए, तो अलग-अलग विभागों के जूनियर डॉक्टरों की टीम ने मोर्चा संभाला और जान जोखिम में पड़े मरीज की तत्काल ओटी लगाई। इस जीवन रक्षक टीम में ईएनटी विभाग से एपी डॉ. हिमानी, डॉ. प्रियंका, एसआर डॉ. मोहसिन और जेआर डॉ. अनुराग शामिल रहे।
वहीं, एनेस्थीसिया विभाग से एपी डॉ. गुंजन, जेआर डॉ. शुभांगी व डॉ. ज्योति, सर्जरी विभाग से जेआर डॉ. अभिषेक साहू, डेंटल विभाग से दो एसआर डॉ. विदिशा पुनेठा व डॉ. ज्योत्सना और प्लास्टिक सर्जरी विभाग से जेआर डॉ. देवआशीष ने मिलकर इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। बाद में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट के निर्देश पर डेंटल से एपी डॉ अंकुर जोशी भी पहुंचे।
दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. विनम्र मित्तल का कहना है कि घायल युवक की स्थिति काफी नाजुक थी। तत्काल डॉक्टरों की टीम ने इमरजेंसी में ही सर्जरी की है। फिलहाल मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है। जो डॉक्टर बुलाने पर भी नहीं आए, उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

