
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और कठोर दमन के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तत्काल कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईरान के धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई जरूरी है, ताकि शासन ढह सके और कम से कम लोगों की जान बचाई जा सके। यह अपील ऐसे समय में आई है जब ईरान में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हुए हैं, इंटरनेट ब्लैकआउट और सुरक्षा बलों की गोलीबारी जारी है। पहलवी ने CBS न्यूज को दिए इंटरव्यू में इसे ‘युद्ध’ बताया और कहा कि ट्रंप की ‘रेड लाइन’ पहले ही पार हो चुकी है। बता दें कि पहलवी अपने पिता और ईरान के अंतिम शाह के 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से बेदखल होने के बाद से निर्वासन में रह रहे हैं, जिसके बाद वर्तमान व्यवस्था सत्ता में आई। उन्होंने कहा कि वह ट्रंप प्रशासन के संपर्क में हैं।
इस शासन को जाना ही होगा
सोमवार को सीबीएस न्यूज से बात करते हुए पहलवी ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के साथ इस्लामी गणराज्य की हालिया पहल का उद्देश्य देशव्यापी प्रदर्शनों को रोकना था, जो उनके अनुसार सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के लिए खतरा बन सकते हैं। पहलवी ने दावा किया कि ट्रंप द्वारा बताई गई ‘रेड लाइन’ पहले ही पार हो चुकी है और तेहरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वह अशांति को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह निर्णायक क्षण तब होगा जब इस शासन को पता चलेगा कि दुनिया की प्रतिक्रिया के बिना वे दमन के निरंतर अभियान पर अब और भरोसा नहीं कर सकते। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं, तो पहलवी ने कहा कि ईरानियों के साथ ट्रंप की एकजुटता की अभिव्यक्ति का मतलब उनकी मांग का समर्थन करना है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग यह है कि इस शासन को जाना होगा।
मैं एक सेतु हूं, मंजिल नहीं…
जब उनसे पूछा गया कि हिंसा के बावजूद लगातार प्रदर्शनों को प्रोत्साहित करना जिम्मेदार कदम है या नहीं, तो पहलवी ने सीधे जवाब नहीं दिया और कहा कि यह एक युद्ध है और युद्ध में जान-माल का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु दर को कम करने, निर्दोष पीड़ितों को इस शासन द्वारा फिर से मारे जाने से बचाने और उनकी रक्षा करने के लिए कार्रवाई की आवश्यकता है। पहलवी ने कहा कि वह विदेशों में रहने वाले ईरानियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनके नाम के नारे उस भूमिका की वैधता को दर्शाते हैं जो वह निभा सकते हैं, भले ही देश के भीतर उनके समर्थन की सीमा पर सवाल बने हुए हों। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं ईरान को अपनी सेवाएं क्यों दे रहा हूं? मैं उनकी पुकार का जवाब दे रहा हूं। इस समय मैं एक सेतु हूं, मंजिल नहीं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे आंदोलन के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार होंगे, तो उन्होंने सुरक्षा बलों का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों के निडर रवैये का हवाला देते हुए कहा कि वे ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं उनके लिए मरने को तैयार क्यों नहीं होऊंगा? स्वतंत्रता के लिए मरने को, अपने राष्ट्र को बचाने के लिए मरने को? मैं इसके लिए तैयार हूं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मुद्रा के पतन के कारण पिछले महीने भड़की मौजूदा अशांति, पहले के विद्रोहों से अलग है। उन्होंने कहा कि आज मांग सिर्फ सुधारों की नहीं है, या यूं कहें कि आर्थिक मांगों की भी नहीं। यह इस शासन व्यवस्था का अंत करने की मांग है। यही वास्तव में सही मायने में क्रांति है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा था?
ट्रंप ने रविवार रात पत्रकारों को बताया कि उन्होंने शनिवार को ईरानी नेताओं से बात की और कहा कि उन्होंने ‘बातचीत के लिए सहमति’ जताई, जबकि उन्होंने शासन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि अगर शासन ‘पहले की तरह लोगों की हत्याएं’ करने लगा तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने कहा था कि हम उन्हें वहीं पर करारा प्रहार करेंगे जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन पर सीधे हमला करेंगे जहां उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ होगी। वहीं, वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सोमवार को कहा कि प्रशासन हवाई हमलों सहित सभी विकल्पों को खुला रख रहा है।