भारतीय ग्रामोथान संस्था, ऋषिकेश में आज Export Promotion Council for Handicrafts (EPCH) द्वारा हस्तशिल्प निर्यात एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में स्थानीय कारीगरों, युवाओं और उद्यमिता में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला का मुख्य विषय “Entrepreneurship: Understanding Entrepreneurial Concepts, Idea Generation & Introduction to Handicrafts Exports” रहा। इस दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उद्यमिता के मूलभूत सिद्धांत, नए बिजनेस आइडिया विकसित करने के तरीके और हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान Centre for Handicrafts Exports Management Studies के अंतर्गत संचालित ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स की भी जानकारी साझा की गई। वक्ताओं ने बताया कि इस कोर्स में डिजाइन ट्रेंड, एक्सपोर्ट मार्केटिंग, फाइनेंस मैनेजमेंट, सप्लाई चेन, पैकेजिंग और शिपिंग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह कोर्स कारीगरों को वैश्विक बाजार की मांग के अनुसार अपने उत्पादों को तैयार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से निर्यात करने में मदद करेगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर निगम ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान एवं उत्तराखंड सरकार में हैंडलूम विभाग के राज्यमंत्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कारीगरों को आधुनिक तकनीकों और नए बाजारों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर भारतीय ग्राम्मोथान संस्था की अध्यक्षा गीता चंदोला, प्रभारी अनिल चंदोला एवं पीआरओ एन.पी. कुकसाल की भी विशेष उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें निरंतर सीखने और अपने हुनर को व्यवसायिक रूप देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के सफल संचालन और व्यापक कवरेज में रेडियो ऋषिकेश की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने न केवल कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से मैनेज किया, बल्कि विभिन्न गतिविधियों और सत्रों की प्रभावी रिपोर्टिंग भी की।
कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों ने बताया कि हस्तशिल्प क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। यदि कारीगरों को सही प्रशिक्षण, उचित मार्गदर्शन और बाजार से सीधा जुड़ाव मिल जाए, तो वे न केवल अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं, बल्कि देश के निर्यात को भी सशक्त बना सकते हैं। इस पहल से क्षेत्र के कारीगरों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


