पश्चिम एशिया में ईरान बनाम अमेरिका और इजरायल की लड़ाई दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर के साथ थम गई है। ईरान और अमेरिका अपने-अपने लोगों के सामने इस सीजफायर को जीत की तरह पेश कर रहे हैं, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए यह सीजफायर मुसीबत का सबब बन गया है। ट्रंप द्वारा की गई युद्धविराम की घोषणा के बाद इजरायल की घरेलू राजनीति में तूफान मचा हुआ है। विपक्ष लगातार पीएम नेतन्याहू पर सवाल उठा रहा है।
ईरान में सीजफायर की घोषणा के बाद इजरायल के नेता प्रतिपक्ष यैर लिपिड ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपने इतिहास में कभी भी इस तरह की राजनीतिक विफलता नहीं देखी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह इजरायल की जनता का अपमान है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जुड़े अहम फैसलों पर इजरायल को शामिल ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “इजरायल उन फैसलों को टेबल पर मौजूद ही नहीं था, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के मूल मुद्दों से जुड़े थे।”
IDF ने मजबूती से किया काम, नेतन्याहू असफल: यैर लिपिड
पिछले एक महीने से जारी ईरान युद्ध में लड़ रही इजरायली सेना की लापिड ने तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध में इजरायली सेना ने अपना काम पूरी तरह से किया, यहां तक की इजरायली जनता ने भी मजबूती दिखाई। लेकिन नेतन्याहू राजनीतिक और रणनीतिक रूप से पूरी तरह असफल रहे। लिपिड के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री ने इस युद्ध को लेकर जितने भी लक्ष्य तय किए थे, उनमें से एक को भी हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की इस अहंकार पूर्ण और लापरवाही योजना की वजह से जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक करने में कई साल लग जाएंगे।
ईरान युद्ध में हुआ सीजफायल, इजरायल का समर्थन
28 फरवरी को ईरान में हमले के साथ शुरू हुआ पश्चिम एशिया का युद्ध ट्रंप द्वारा सीजफायर की घोषणा के साथ थम गया। कुछ देर बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कुछ शर्तों के साथ सीजफायर पर सहमति जताई और होर्मुज को भी खोलने पर स्वीकृति दी। इजरायल की तरफ से भी इस युद्ध में सीजफायर को स्वीकार किया गया, लेकिन नेतन्याहू के ऑफिस की तरफ से साफ किया गया कि लेबनान में जारी नहीं रुकेंगे।
बता दें, इस सीजफायर में पाकिस्तान महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका दोनों की तरफ से इस बात पर सहमति जताई गई है कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में चर्चा होगी। अमेरिका और ईरान दोनों ही इस सीजफायर को अपनी-अपनी जीत करार दे रहे हैं। लेकिन नेतन्याहू के लिए स्थिति अलग है। ईरान के सीधे निशाने पर पिछले पांच दशकों में इजरायल ही रहा है। ऐसे में नेतन्याहू समेत की इजरायली प्रधानमंत्री ईरान को अपना दुश्मन नंबर एक बता चुके हैं। ऐसी स्थिति में जब ईरान के खिलाफ युद्ध को सीजफायर पर ले गए हैं, तो विपक्ष इस फैसले के ऊपर लगातार सवाल उठा रहा है। पहले से भी घरेलू स्तर पर नेतन्याहू लगातार कमजोर हो रहे हैं, इस फैसले के बाद उनका ग्राफ और नीचे जा सकता है।

