जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की एक बात मानी पर क्यों झटका भी लगा; समझें पूरी बात

लंबे समय से कानूनी विवादों में उलझे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों एक जज के खिलाफ ही पूरा जोर लगाए हुए हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के अलग हो जाने की अपील को लेकर अदालत में अपनी ‘वकालत क्षमता’दिखा चुके केजरीवाल गुरुवार को एक बार फिर कोर्ट में हाजिर हुए। एक नई दलील के साथ हलफनामा रजिस्ट्री में स्वीकार नहीं किए जाने के बाद केजरीवाल ने अदालत में अपनी गुहार लगाई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उनके हलफनाम को रजिस्ट्री में स्वीकार किए जाने की मंजूरी तो दी लेकिन यह कहकर झटका भी दिया कि फैसला सुरक्षित किया जा चुका है और अब इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को एक घंटे से अधिक समय तक अदालत में अपनी पैरवी खुद करने के बाद 14 अप्रैल को एक नया हलफनामा अदालत में दाखिल करने की कोशिश की। उन्होंने इसमें आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं और इसलिए यह हितों के टकराव का मामला बनता है, क्योंकि उनके बच्चों के केस आवंटित करने वाले सॉलिसिटर जनरल सीबीआई का पक्ष रख रहे हैं। पिछले दिनों ट्रायल कोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था।

जस्टिस शर्मा ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि फैसला सुरक्षित रख लेने के बाद वह मामले को दोबारा नहीं खोलने जा रही हैं। केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए थे। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने केस को किसी और बेंच के सामने ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अदालत में रिक्यूजल याचिका दाखिल की थी। इसके तहत कोई पक्ष जज से अपील करता है कि वह खुद को इस मामले से अलग कर लें।

अदालत ने किया साफ- फैसला पहले ही सुरक्षित

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेंसी भी लिखित जवाब दाखिल करेगी। केजरीवाल की अपील पर जस्टिस शर्मा ने जांच एजेंसी से जवाब की एक प्रति उन्हें देने को कहा। हालांकि जज ने दो टूक कहा, ‘लेकिन मामला सुरक्षित किया जा चुका है। मैं इसे दोबारा नहीं खोलने जा रही हूं। रिजर्व किए जा चुके मैटर दोबारा नहीं खोले जाते हैं।

केजरीवाल ने एक घंटे से अधिक समय तक रखीं थीं दलीलें

पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में खुद अपनी दलीलें रखीं। वह एक घंटे से अधिक समय तक जिरह करते रहे। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने अपने कई तर्क रखे और बताया कि क्यों उन्हें लगता है कि अगर वह आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई जारी रखती हैं तो उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। केजरीवाल ने जज के पुराने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायाधीश के सुनवाई से अलग होने से जुड़े कानून के तहत सवाल किसी न्यायधीश की ईमानदारी या निष्पक्षता का नहीं, बल्कि मुकदमे के पक्षकार के मन में ‘पक्षपात’ की आशंका का होता है। जस्टिस शर्मा ने आप प्रमुख, शराब नीति मामले में आरोपमुक्त किए गए अन्य लोगों के वकील और सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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