उत्तराखंड की चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ (ये पेड़ नहीं गिरेगा) का चयन प्रतिष्ठित लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ है। यह फिल्म 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी के संघर्ष, साहस और चिपको आंदोलन में उनके योगदान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगी।
करीब चार वर्षों में तैयार हुई यह डॉक्यूमेंट्री उत्तराखंड के हिमालयी गांवों की उन महिलाओं की प्रेरक कहानी को सामने लाती है, जिन्होंने लगभग पांच दशक पहले पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें गले लगाकर विश्व प्रसिद्ध ‘चिपको आंदोलन’ को नई पहचान दी थी। फिल्म में दिखाया गया है कि सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद महिलाओं ने प्रकृति संरक्षण के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
फिल्म के राइटर दीपक रमोला
दीपक ने बताया कि इतिहास के कुछ सबसे बड़े पर्यावरण आंदोलन गौरा देवी जैसी उन महिलाओं की वजह से शुरू हुए, जिनकी जिंदगी उन जंगलों से गहराई से जुड़ी थी जिन्हें वे अपना घर मानती थीं। ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ उस महिला की कहानी है, जिस ने पेड़ों को कटने से बचाने को उन्हें गले लगा लिया।
फिल्म फेस्टिवल में चयन
फिल्म की कहानी दीपक रमोला व अपूर्वा बख्शी ने लिखी है, निर्माण अपूर्वा बख्शी, दीपक रमोला व मनीषा त्यागराजन ने किया है। ध्रुव वर्मा और सिद्धार्थ गोविंदन ने सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी निभाई है। संपादन अजीत नायर और ध्रुव वर्मा ने किया। फिल्म का संगीत ताजदार जुनैद ने तैयार किया है।
दीपक ने बताया, फिल्म महिलाओं की पर्यावरणीय समझ, उनके नेतृत्व और जमीनी संघर्ष को प्रभावी ढंग से सामने लाती है। लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में चयन उत्तराखंड, चिपको आंदोलन और सुदेशा देवी के संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह फेस्टिवल लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में 19 जुलाई तक चलेगा।

