हस्तनिर्मित उत्पादों में उत्तराखंड की संस्कृति एवं पहचान जरूरी, एनआईडी एवं ग्रामोत्थान संस्था की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

सोमवार को  भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, ढ़ालवाला एवं राष्ट्रीय डिजाइन संस्था (एनआईडी), अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय हस्तनिर्मित उत्पाद डिज़ाइन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन एनआईडी की एपेरल डिजाइनर सोनल चौहान, जिला उद्योग केंद्र नरेंद्रनगर की प्रबंधक कृतिका कुलश्री तथा ग्रामोत्थान संस्था की अध्यक्षा श्रीमती गीता चंदोला द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यशाला में संस्था प्रभारी श्री अनिल चंदोला ने उपस्थित हस्तिशिल्पीयों को कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके पश्चात एनआईडी की डिजाइनर सोनल चौहान ने उपस्थित हस्तशिल्पियों को विभिन्न डिजाइनों की जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार के डिज़ाइन पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं।

डिजाइनर सोनल चौहान ने कहा कि “हर हस्तनिर्मित उत्पाद में उत्तराखंड की संस्कृति और पहचान दिखाई देनी चाहिए। यही हमारी विशिष्टता है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उत्पादों का आकार छोटा या मीडियम होना चाहिए ताकि पर्यटक उन्हें आसानी से अपने साथ ले जा सकें। साथ ही उत्पादों की कीमत ऐसी होनी चाहिए कि मध्यमवर्गीय ग्राहक भी उन्हें सहजता से खरीद सकें।

कार्यक्रम का संचालन संस्था के जनसंपर्क अधिकारी श्री नरेंद्र कुकशाल ने किया। कार्यशाला में एनआईडी से सोनल चौहान, अमीशा बाजपाई, विनीता ओसवाल, जिला उद्योग केंद्र की प्रबंधक कृतिका, गीता चंदोला, अनिल चंदोला, बीना पुंडीर, राम सेवक रतूड़ी सहित अनेक शिल्पकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *