ढालवाला स्थित भारतीय ग्रामोत्थान संस्था एवं राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय हस्तनिर्मित उत्पाद डिजाइन कार्यशाला के दूसरे दिन स्थानीय हस्तशिल्पियों ने डिजाइन के नए तौर-तरीके सीखे।

कार्यशाला का शुभारंभ नाबार्ड के उपमहाप्रबंधक श्री रविदास और संस्था की अध्यक्षा श्रीमती गीता चंदोला ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर प्रतिभागी हस्तशिल्पियों को भीमल, कंडाली और जूट से बने उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का संचालन कर रहीं डिजाइनर सोनल चौहान ने बताया कि उत्पादों में उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड के पारंपरिक डिजाइनों को यदि आधुनिकता के साथ जोड़ा जाए, तो यह पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बन सकता है। ऋषिकेश जैसी आध्यात्मिक नगरी से जुड़े प्रतीकात्मक उत्पादों की बाजार में विशेष माँग रहती है।”

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ट्रेसिंग चार्ट पर विभिन्न डिजाइनों का अभ्यास कराया गया और उन्हें डिजाइन की मूलभूत अवधारणाओं से अवगत कराया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
इस अवसर पर नाबार्ड के प्रबंधक श्री मधुबनपांगती, एनआईडी से अमीशा बाजपाई और विनीता ओसवाल, संस्था प्रभारी श्री अनिल चंदोला, जनसंपर्क अधिकारी श्री नरेंद्र कुकशाल, श्रीमती बीना पुंडीर, अंकित रावत आदि उपस्थित रहे।
