उत्तराखंड में मौसम के मिजाज ने ऐसा यू-टर्न लिया है कि अप्रैल के महीने में ही लोगों को दिसंबर जैसी ठिठुरन का अहसास होने लगा है। मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार दोपहर तक जारी रही, जिससे राजधानी देहरादून का पारा सामान्य से आठ डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर गया। वहीं बारिश के कारण फसल और बागवानी को भी काफी नुकसान पहुंचा है। पहाड़ों में झमाझम बारिश और बर्फबारी से गर्म कपड़े, अलाव और हीटर सहारा बन गए हैं। मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान 1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने 13 अप्रैल तक पहाड़ों में इसी तरह बारिश और बर्फबारी की आशंका जताई है।
देहरादून में इस बार की बारिश ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। साल 2020 के बाद यह अप्रैल में एक दिन में सबसे ज्यादा बारिश है। बुधवार सुबह 10:30 बजे दून का तापमान महज 16 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि इन दिनों यहां औसत तापमान 32 डिग्री के करीब रहता है।दून के मोहकमपुर में 18.5 एमएम, चकराता में 36 एमएम और मसूरी में 35 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई। जबकि साल 2020 में 24 घंटे के भीतर 48 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। उसके बाद अब सर्वाधिक 18.5 एमएम बारिश 24 घंटे में हुई है।
मुनस्यारी में एक डिग्री पहुंचा पारा
पिथौरागढ़ जनपद में लगातार हो रही बारिश-बर्फबारी के कारण अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मुनस्यारी में बुधवार को का न्यूनतम तापमान एक डिग्री दर्ज किया गया। मुनस्यारी में अधिकतम तापमान नौ डिग्री रहा। जिला मुख्यालय में भी तापमान में गिरावट देखने को मिली है। बर्फबारी वाले क्षेत्रों से आ रही सर्द हवाओं ने घाटी वाले इलाकों में ठंड को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। दुकानों और घरों पर लोग अलाव जलाकर तापने को मजबूर हो गए हैं।
धारचूला और मुन्यारी में बर्फबारी
धारचूला और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रात से ही बर्फबारी का सिलसिला जारी हुआ, जो बुधवार को भी जारी रहा। पंचाचूली, हंसलिंग, मिलम, राजरंभा, खलियाटॉप आदि चोटियां बर्फ से सफेद हो गए हैं। खलिया में तीन इंच बर्फ गिरी है। इधर मिलम में चार तो लास्पा में दो इंच तक बर्फबारी हुई है। दारमा और व्यास घाटी के गांवों नाभीढांग, छियालेख समेत अन्य इलाकों में ताज हिमपात हुआ है। वहीं, जिला मुख्यालय समेत अन्य निचले इलाकों में दिनभर झमाझम बारिश हुई। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा।
खेती-किसानी पर मंडराया संकट
बेमौसम की इस बारिश और बर्फबारी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस समय पहाड़ों में फलों (जैसे आड़ू, खुमानी और सेब) के खिलने का समय है। बागवानी और खेती से जुड़े लोगों का कहना है कि ओलावृष्टि और ठंडी हवाओं से फूलों के झड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है। इधर खेतों में खड़ी गेहूं और अन्य फसलों के लिए भी यह अधिक नमी हानिकारक साबित हो रही है। मैदानी क्षेत्र में खड़ी गेहूं की फसल पर जलभराव हो गया है। खेतों में कटी हुई फसल खराब होने के कगार पर पहुंच गई है।
आगे भी चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 9 अप्रैल से 13 अप्रैल तक उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गर्जन की संभावना है। नैनीताल समेत अन्य पर्वतीय हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना है। 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। 13 अप्रैल के बाद मौसम सामान्य रहेगा।

