उत्तराखंड में एक साथ मौसम के 3 रंग; आग-ओलों और बारिश के बाद IMD ने फिर चेताया

उत्तराखंड में मौसम हैरान करने वाला रूप दिखा रहा है। एक ओर सूरज की तपिश से बढ़ती गर्मी के चलते राज्य के कई हिस्सों में जंगलों में आग की घटनाएं सामने आईं, वहीं बागेश्वर में ओलावृष्टि के रूप में मौसम ने बिल्कुल अलग रंग दिखाया। प्रदेश में जोशीयाड़ा के बाड़ाहाट रेंज में गुरुवार को ज्ञानसू के पास जंगल आग से धधकता रहा। उधर, बागेश्वर जिले के कर्मी क्षेत्र में गुरुवार को ओले पड़े और रात को देहरादून समेत प्रदेश के विभिन्न इलाकों में तेज बारिश हुई। राजधानी में बारिश के चलते पारे में तेज गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश, मेघगगर्जन और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है।

उत्तराखंड में गर्मी बढ़ने के साथ जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। प्रदेशभर में गुरुवार को 37 जगह वनाग्नि भड़की। इससे सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। वन विभाग के अनुसार, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने पूरे प्रदेश में 150 से ज्यादा फायर अलर्ट जारी किए। इस बीच मौसम विभाग ने बयान में बताया, राज्य के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, मेघगर्जन और 3,800 मीटर और उससे अधिक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है।

सात जिलों में अलर्ट

उत्तराखंड के सात जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि, भारी बारिश और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं (जो 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं) के साथ मेघगर्जन की संभावना है।

आग बुझाने में सहयोग नहीं किया तो जाना पड़ेगा जेल

उधर, जंगल की आग बुझाने में सहयोग ना करने वाले लोगों पर अब मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं के बीच वन विभाग यह सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। वन उपज लेने वाले, लकड़ी काटने की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले, वन विभाग में कार्यरत कर्मचारी और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोग इसके दायरे में आएंगे। भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए गुरुवार को वन विभाग ने सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में लगातार आग की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इससे आग पर समय रहते काबू पाने में दिक्कतें आ रही हैं और वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है।

सरकार की सख्ती

इसी को देखते हुए अब कानूनी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया है। भारतीय वन अधिनियम के तहत ऐसे लोगों को जंगल में आग लगने की सूचना तत्काल वन विभाग या पुलिस को देनी होती है। साथ ही आग बुझाने, आग को दूसरे क्षेत्रों में फैलने से रोकने, वन अपराधों की सूचना देने और अपराधियों की पहचान कराने में भी सहयोग करना अनिवार्य है। लेकिन लोग इसका उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे में उन पर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

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