नीट पेपर लीक पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में छात्रों के आंदोलन के बाद भले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया हो और CJP ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया हो लेकिन ऐसा लगता है कि इस प्रकरण ने अगले आंदोलन के लिए रास्ता खोल दिया है। जंतर-मंतर पर अब एक नया मोर्चा खुल गया है, जिसके निशाने पर हैं केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुद्दा है—E20 पेट्रोल (इथेनॉल मिश्रित ईंधन)।
दरअसल, इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन तो पहले से ही चल रहे थे, लेकिन NEET-UG पेपर लीक के आंदोलन ने उन्हें एक महीने के लिए दबा दिया था। अब फिर से E20 पेट्रोल के मुद्दे ने नए जोश के साथ जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। जंतर-मंतर पर कई लोगों को हाथों में इसके समर्थन में तख्तियां थामे देखा गया। उन तख्तियों पर ‘घर नहीं जाएंगे, एक और विकेट गिराएंगे’ जैसे नारे लिखे थे। शनिवार (25 जुलाई) को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और CJP की जीत के दावे के साथ, अनिवार्य इथेनॉल ब्लेंडिंग का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को लगता है कि उन्हें भी जीत मिल सकती है क्योंकि देश में केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा है।
‘E20 जनता पार्टी’ का उदय और संसद कूच की तैयारी
लिहाजा, कई संकेत बताते हैं कि आने वाले दिनों में इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल का मुद्दा और ज़ोर पकड़ सकता है। इसी को देखते हुए CJP की तर्ज पर अब सोशल मीडिया पर ‘E20 जनता पार्टी’ का गठन किया गया है, जो तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इंस्टाग्राम पर ‘E20 जनता पार्टी’ के 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने अब डिजिटल वॉर को सड़कों पर उतारने का फैसला किया है। कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला के नेतृत्व में 31 जुलाई को ‘संसद मार्च’ निकाला जाएगा।
केजरीवाल भी करेंगे आंदोलन
दूसरी तरफ, दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने 4 अगस्त को इस मुद्दे पर संसद तक मार्च करने की घोषणा की है। यह सब तब हो रहा है जब ‘लोकलसर्कल्स’ के एक सर्वे में दावा किया गया है कि 2023 से पहले की गाड़ियों के 60% मालिकों ने माइलेज कम होने की समस्या बताई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी घोषणा की है कि पार्टी 1 अगस्त को इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के खिलाफ ‘E20 के खिलाफ राष्ट्रीय टाउनहॉल’ आंदोलन करेगी।
60% पुराने वाहन मालिकों की बढ़ी मुश्किलें
इथेनॉल ब्लेंडिंग के विरोध की सबसे बड़ी वजह हाल ही में आया ‘लोकल सर्किल्स’ का सर्वे है। इसके अनुसार, 2023 से पहले के 60% वाहन मालिकों ने माइलेज में भारी गिरावट की शिकायत की है। सर्वे में शामिल 67% लोगों का कहना है कि 2025 की शुरुआत से उनके वाहन की फ्यूल एफिशिएंसी 10% से अधिक गिर गई है, जबकि 45% लोग इंजन में खराबी और बढ़ते रखरखाव खर्च से परेशान हैं। ट्रांसपोर्टर्स का दावा है कि 2015 से पुराने इंजन 20% इथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन ही नहीं किए गए थे।
क्या हैं आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारी इथेनॉल के पूरी तरह विरोध में नहीं हैं, बल्कि वे ‘विकल्प की आजादी’ मांग रहे हैं। उनकी मांग है कि नई गाड़ियों के लिए E20 मिले, लेकिन पुरानी गाड़ियों के लिए E10 और शुद्ध पेट्रोल (E0) का विकल्प भी उपलब्ध हों। इसके अलावा शुद्ध पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से कम की जाए और नीति से जुड़े सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए और इसकी स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा हो। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (जो इथेनॉल पॉलिसी का चेहरा बन गए हैं) और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (जिनके नेतृत्व में यह पॉलिसी शुरू की जा रही है) के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सरकार का पक्ष और गडकरी की कानूनी कार्रवाई
दूसरी ओर, नितिन गडकरी ने इस मुद्दे पर हो रहे भ्रामक प्रचार और अपने परिवार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार का लगातार यह स्टैंड रहा है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और इसे कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही लागू किया गया है। सरकार के अनुसार, यह कदम कच्चे तेल के आयात को कम करने, प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक है।

