
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर NABARD द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था, ढालवाला में किया गया। इस दौरान 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में करीब 50 महिला बुनकरों एवं हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके कार्यक्षेत्र से जुड़ी नई तकनीक, बैंकिंग सुविधाओं, सरकारी योजनाओं, डिजाइन, बाजार एवं स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

कार्यक्रम में श्री ए.एन. शुक्ला जी DDM नाबार्ड टिहरी गढ़वाल, श्री एम.एस. सजवाण जी महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र नरेंद्रनगर टिहरी गढ़वाल, सुश्री माधवी भट्ट जी सहायक निदेशक(UHHDC), सुश्री आयुषी गुप्ता जी हैंडलूम डिजाइनर, श्री सुधांशु डिमरी जी इंडियन ओवरसीज बैंक के सहायक प्रबंधक, गीता चंदोला भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की अध्यक्षा तथा अनिल चंदोला संस्था के प्रभारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

कार्यशाला के दौरान सभी विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी महिला बुनकरों के साथ साझा की। DDM नाबार्ड ए. एन. शुक्ला ने नाबार्ड की योजनाओं, वित्तीय सहायता और ग्रामीण महिलाओं के लिए उपलब्ध स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी। महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र नरेंद्रनगर एम.एस. सजवान ने उद्योग विभाग की योजनाओं एवं उद्यमिता के अवसरों की जानकारी देते हुए महिलाओं से अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देने का आह्वान किया।
सहायक निदेशक माधवी भट्ट (UHHDC) ने उत्पादों की गुणवत्ता एवं बाजार की जरूरतों के अनुरूप कार्य करने की जानकारी दी। वहीं हैंडलूम डिजाइनर आयुषी गुप्ता ने नए डिजाइन, रंग संयोजन, उत्पाद विविधीकरण और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए। IOB के सहायक प्रबंधक सुधांशु डिमरी ने बैंकिंग सेवाओं, ऋण सुविधाओं एवं वित्तीय प्रबंधन से संबंधित जानकारी महिलाओं के साथ साझा की।

भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की अध्यक्षा गीता चंदोला ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिला बुनकरों से अपने हुनर को नई तकनीक और बाजार की जरूरतों के साथ जोड़कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला ने कार्यशाला के आयोजन को महिला बुनकरों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से महिलाओं को अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, नई जानकारी हासिल करने और बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को उचित मंच और बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में चार महिला समूहों ने अपने हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई। प्रदर्शनी में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर महिलाओं के हुनर और उनके प्रयासों की सराहना की।

कार्यशाला के दौरान महिला बुनकरों ने अपने अनुभव एवं कार्यक्षेत्र से जुड़ी समस्याएं भी अतिथियों के सामने रखीं। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का समाधान करते हुए उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, नए डिजाइन अपनाने तथा उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए आवश्यक सुझाव दिए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला बुनकरों एवं हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाओं को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन महिलाओं का हुनर न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक कला एवं हथकरघा संस्कृति को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की हथकरघा एवं हस्तशिल्प परंपरा को आधुनिक डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग, उत्पाद विविधीकरण और बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय में वृद्धि की जा सकती है। इस तरह के प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
