मसूरी की बुलंद आवाज खामोश, पद्मश्री ह्यूग गैंट्जर के विरोध पर इंदिरा गांधी को भी झुकना पड़ा था

पद्मश्री ह्यूग गैंट्जर का योगदान मसूरी को बचाने के लिए भी हमेशा याद किया जायेगा। उन्होंने मसूरी में चूने की खदानों में खनन से मसूरी के प्राकृतिक सौंदर्य को हो रहे नुकसान को लेकर आवाज बुलंद की थी। गैंट्जर का 95 साल की उम्र में मसूरी में निधन हो गया। वो कुछ दिन से बीमार थे। भारत की नौसेना से कमांडर के पद से सेवानिवृत्त गैंट्जर यात्रा वृतांत लेखक रहे।

जानकारी के अनुसार, गैंट्जर करीब एक माह पूर्व घर में गिर गए थे, जिससे उन्हें चोटें आई थीं। इसके बाद से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। बुधवार सुबह उन्हें कैमल्स बैक कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। नौ जनवरी 1931 को पटना में जन्मे गैंट्जर ने हैम्पटन कोर्ट स्कूल, सेंट जॉर्ज कॉलेज मसूरी, सेंट जोसेफ स्कूल नैनीताल, सेंट जेवियर्स महाविद्यालय कलकत्ता और मुंबई में केसी विधि महाविद्यालय से शिक्षा पूरी की।

विरोध पर इंदिरा गांधी को भी झुकना पड़ा

1983-84 में ह्यूज ने मसूरी दूनघाटी में चूना पत्थर खदानों के खनन से हो रहे पर्यावरण हानि के आंदोलन में हिस्सा लिया। उनकी शिकायत के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मसूरी में खदान पर रोक लगाई व मसूरी को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में मानीटरिंग कमेटी बनाई गई। इस कमेटी के वह सदस्य रहे। मसूरी में हो रहे खनन व अवैध निर्माण को रोकने में अपना विशेष योगदान दिया। उनके निधन पर सभी राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों ने गहरा दुःख व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने अपने लेखन से पूरे देश ही नहीं विदेशों में भी अपने मसूरी का नाम रोशन किया। भारत सरकार ने उनकी ट्रेवल साहित्य में योगदान पर पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

नौ सेना के अपने अनुभवों को साहित्य जगत में उतारा

नेवी में कमांडर रहे ह्यूग गैंटजर रिटायरमेंट के बाद अपनी पत्नी के साथ मसूरी में ही रहे। उन्होंने नौ सेना के अपने अनुभवों को साहित्य जगत में उतारा व अपनी पत्नी कोलीन गैंटजर के साथ ट्रैवल राइटर बन गए। उन्होंने पांच दशकों से अधिक समय तक ट्रैवल राइटिंग का काम किया। भारत की अलग-अलग विरासत और छिपे हुए रत्नों को डॉक्यूमेंट करने के लिए ह्यूग गैंटरज और कोलीन गैंटजर के समर्पण को उनकी 30 से अधिक किताबों, हजारों लेखों और दूरदर्शन पर प्रसारित 52 डॉक्यूमेंट्री में देखा जा सकता है। इतिहासकार गणेश शैली ने बताया कि वह और गैंटजर अक्सर फोन पर बात करते थे और शहर में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी एक-दूसरे को देते रहते थे। उनकी पत्नी कोलीन गैंटजर का निधन तीन माह पूर्व 6 नवंबर, 2024 को 90 साल की उम्र में हुआ था।

90 सालों से मसूरी में परिवार

गैंट्जर परिवार मसूरी में आईटीबीपी परिसर के निकट पिछले लगभग 90 सालों से ओकब्रुक काटेज में रहते थे। दो साल पहले उनकी पत्नि कोलिन ग्रेजंर का निधन हो गया था।उनके पिता जेएफ गैंट्जर ब्रिटिश काल में 1941-43 मसूरी नगर पालिका के प्रशासक और चैयरमैन रहे। परिजनों ने बताया उनके बेटे पीटर गैंट्जर के केरल से आने के बाद बुधवार को कैमल बैक में उनको दफनाया जाएगा। मसूरी के इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी ने बताया कि ह्यूग गैंट्जर एंग्लो-इंडियन थे। मसूरी उनके पूर्वजों की जन्मभूमि थी। गैंट्जर के पिता जेएफ गैंट्जर मसूरी के इतिहास के प्रथम व आखिर व्यक्ति थे, जो अंग्रेजी राज में वर्ष 1941-1943 से मसूरी नगर पालिका (म्युनिसिपल बोर्ड) के प्रशासक व अध्यक्ष साथ साथ रहे।

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