महाशिवरात्रि के स्नान के साथ माघ मेला 2026 संपन्न हो गया। प्रशासन का दावा है कि अंतिम स्नान पर्व पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। वहीं मेला प्रशासन के मुताबिक 44 दिन के माघ मेला के दौरान 22 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। मेला के 44वें दिन भोर से ही श्रद्धालु संगम स्नान करने लगे।
हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही संगम तट पर पहुंचने लगी थी। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र में रात्रि विश्राम किया और भोर में संगम स्नान के बाद शहर के शिव मंदिरों की ओर चल पड़े। सुबह से शाम तक संगम तट पर हर-हर गंगे और हर-हर महादेव की गूंज सुनाई पड़ रही थी। मेला प्रशासन ने महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर 16 लाख श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का अनुमान लगाया था लेकिन सुबह आठ बजे तक ही 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगा ली थी।
सुबह आठ बजे तक श्रद्धालुओं के स्नान करने की सूचना पर मेला प्रशासन और पुलिस संभावित भीड़ को लेकर अलर्ट हुई। लोगों की भीड़ आती देख आठ बजे के बाद चार पहिया वाहनों को परेड में रोका जाने लगा। सिर्फ दोपहिया को ही संगम क्षेत्र में जाने की अनुमति दी गई। धूप खिलने के बाद संगम नोज श्रद्धालुओं से पट गया।
माघ मेला 2026 में टूटा कुंभ 2013 का रिकॉर्ड
माघ मेला-2026 ने कई मामले में इतिहास रचा है। महाशिवरात्रि स्नान पर्व के साथ समाप्त हुए माघ मेला-2026 में कुम्भ 2013 का रिकॉर्ड टूट गया। कुम्भ-2013 की तुलना में माघ मेला-2026 में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। माघ मेला के कई बड़े स्नान पर्व पर भी कुम्भ-2013 की तुलना में अधिक श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। 44 दिन के माघ मेला-2026 में 22 करोड़ 10 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। वहीं कुम्भ-2013 में 12 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई थी। कुम्भ-2019 में 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया था।
‘कलयुग के श्रवण कुमार’ बने आकर्षण का केंद्र
इसी बीच मेले में एक भावुक दृश्य ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से आए राम भजन यादव अपनी 100 वर्षीय बुजुर्ग मां को कंधे पर बैठाकर संगम तक पहुंचे और उन्हें महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर स्नान कराया। उनकी मां चलने-फिरने में असमर्थ हैं, ऐसे में उन्होंने कई किलोमीटर का सफर तय कर मातृसेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
राम भजन यादव अपने पिता की अस्थियां विसर्जित करने भी संगम आए थे। उन्होंने बताया कि मां की इच्छा थी कि वह महाशिवरात्रि पर संगम स्नान करें, इसलिए वह उन्हें साथ लेकर आए। कंधे पर बैठाकर मां को स्नान कराते देख श्रद्धालु भावुक हो उठे। मेले में मौजूद लोगों ने राम भजन यादव को ‘कलयुग का श्रवण कुमार’ कहकर सम्मानित किया। कई श्रद्धालुओं ने उन्हें फूलमालाएं पहनाकर मातृभक्ति की इस मिसाल की सराहना की। आस्था, सेवा और समर्पण का यह दृश्य माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बना रहा।

