डॉल्फिन इंस्टीट्यूट में क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम के दूसरे दिन भीमल हस्तशिल्प और उद्यमिता पर विशेष जोर

मांडूवाला स्थित Dolphin (PG) Institute of Biomedical and Natural Sciences में आयोजित तीन दिवसीय ‘क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन सह जागरूकता कार्यक्रम’ के दूसरे दिन भी पारंपरिक हस्तशिल्प, विशेष रूप से भीमल फाइबर से बनने वाले उत्पादों और कारीगरों की उद्यमिता क्षमता को विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। यह कार्यक्रम Ministry of Textiles के अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से Rishikesh Natural Fiber Handicraft Producer Company Limited द्वारा आयोजित किया जा रहा है।


बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गिरीश डोभाल, उपाध्यक्ष प्रांतीय मधुमक्खी पालन परिषद तथा अति विशिष्ट अतिथि आशीष डोभाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं कम्युनिटी इन्फ्लुएंसर द्वारा किया गया। इस अवसर पर दोनों अतिथियों ने उत्तराखंड की पारंपरिक कला और शिल्प को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि गिरीश डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय कारीगरों को उद्यमशीलता कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार ढालना आवश्यक है, ताकि शिल्पकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिल सके।
अति विशिष्ट अतिथि आशीष डोभाल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि डिजिटल युग में हस्तशिल्प उत्पादों की ब्रांडिंग और ऑनलाइन पहचान बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कारीगरों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कंपनी की निदेशक श्रीमती बीना पुंडीर ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को सही मंच और प्रशिक्षण मिले तो वे अपने उत्पादों के माध्यम से वैश्विक पहचान बना सकते हैं।

10 से 12 मार्च तक आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के प्राकृतिक फाइबर से तैयार होने वाले भीमल क्राफ्ट को प्रोत्साहित करना और इसे व्यापक पहचान दिलाना है। कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 20 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिन्हें अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण सत्रों में हस्तशिल्प विशेषज्ञ विमला नेगी, विमला चौहान, बसंती रावत और ममता नेगी प्रतिभागियों को भीमल फाइबर से विभिन्न उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार करने की तकनीक सिखा रही हैं। इन सत्रों में कारीगरों को पारंपरिक कौशल के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता सुधार और बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित कार्यशालाओं में डिजाइन नवाचार पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें प्रतिभागियों को भीमल फाइबर से आधुनिक और उपयोगी उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही उद्योग विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें बाजार की चुनौतियों, उत्पाद की ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का संचालन राज्य पुरस्कार विजेता श्रीमती बीना पुंडीर (इवेंट कोऑर्डिनेटर) तथा निदेशक अनिल चन्दोला के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने में सहायक सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के अपर निदेशक (प्रशासन) सुनील कौल, डीन अकादमिक प्रो. ज्ञानेंद्र अवस्थी, डीन रिसर्च प्रो. वर्षा पर्चा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सुधीर भारती तथा प्रबंधन टीम के सदस्य डॉ. श्रुति शर्मा, विपुल गर्ग और डॉ. आशीष रतूड़ी का विशेष योगदान रहा।


आयोजकों के अनुसार यह पहल न केवल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास है, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिससे उन्हें बाजार से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त हो सकें।

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