उत्तराखंड में मौसम इन दिनों अजीबोगरीब रंग दिखा रहा है। एक तरफ पहाड़ों से लेकर मैदानों तक पारा सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है, वहीं अचानक छाए कुहासे और धुंध के गुबार ने लोगों को हैरत में डाल दिया। देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़ और पंतनगर समेत कई जिलों में सुबह के समय दृश्यता (विजिबिलिटी) काफी कम दर्ज की गई है। लगातार तीसरे दिन कम दृश्यता के चलते 26 हेली उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ. रोहित थपलियाल ने बताया कि वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से आ रही दक्षिण-पूर्वी हवाएं अपने साथ भारी नमी लेकर आई हैं। हवा का रुख बदलने की वजह से आर्द्रता बढ़ गई। जिससे बेमौसम कुहासा जैसा प्रभाव देखने को मिला। हालांकि, गुरुवार से इसमें कमी आने की संभावना है।
पछवादून क्षेत्र में भी बुधवार सुबह घनी धुंध और कोहरे की चादर छा गई। आमतौर पर जनवरी-फरवरी में दिखने वाला यह नजारा मार्च में देखने को मिला तो लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि आखिर गर्मी के मौसम में यह कोहरा कहां से आ गया।
पहाड़ों में बरसे बदरा
बुधवार को कुहासे के बीच पहाड़ों में बारिश दर्ज की गई। धारचूला में सर्वाधिक 20.6 एमएम, जोशीमठ में 10.8 एमएम और मुनस्यारी में 1.4 एमएम बारिश हुई, जिससे आंशिक राहत मिली।
धुंध के चलते तीसरे दिन भी हेली सेवाएं ठप रहीं
हल्द्वानी। पहाड़ों पर छाई घनी धुंध के कारण बुधवार को भी कुमाऊं क्षेत्र में हवाई सेवाएं चरमरा गईं। लगातार तीसरे दिन कम दृश्यता (विजिबिलिटी) के चलते 26 हेली उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। हालांकि देहरादून से कुमाऊं की उड़ानें संचालित हुईं, लेकिन पिथौरागढ़-दिल्ली फ्लाइट रद्द रही। हल्द्वानी के गौलापार हेलीपोर्ट से निजी कंपनी हेरिटेज एविएशन के दो हेलीकॉप्टर रोजाना कुमाऊं के पांच शहरों के लिए कुल 26 उड़ानें भरते हैं। कंपनी के बेस मैनेजर गौरव गहलोत ने बताया कि विजिबिलिटी कम होने से सभी उड़ानें रद्द की गईं हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून से टिहरी, श्रीनगर, गौचर, बागेश्वर और नौकुचियाताल के लिए सेवाएं जारी रहीं। पिथौरागढ़ में कम विजिबिलिटी के कारण दिल्ली की फ्लाइट भी प्रभावित हुई।
आखिर मार्च में कोहरा कैसे?
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि इसकी एक वजह रात और सुबह के तापमान में अंतर होना भी हो सकती है। दिन में तेज गर्मी और रात में अपेक्षाकृत ठंडा मौसम होने से हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे सुबह धुंध बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पश्चिमी विक्षोभ का असर भी हो सकता है। उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे सुबह कोहरा या धुंध बन सकती है। लो विंड स्पीड भी इसका कारण हो सकती है। जब हवा की गति बहुत कम होती है तो प्रदूषण और नमी जमीन के पास जमा हो जाती है और स्मॉग या कोहरा बन जाता है।
देहरादून में पारा 32 डिग्री पार
धुंध के बावजूद प्रदेश में गर्मी का तीखा अहसास बना हुआ है। दून में बुधवार सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। देहरादून में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री पहुंच गया, जो सामान्य से 6.3 डिग्री अधिक है। वहीं, मसूरी में पारा सामान्य से 9.2 डिग्री उछलकर 23.5 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। रात के तापमान में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे पहाड़ों में भी रातें गर्म होने लगी हैं।
16 तक बारिश और बर्फबारी के आसार, आज येलो अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिन पहाड़ों में बारिश का दौर जारी रहेगा। गुरुवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में बारिश संभव है। 3800 मीटर से ऊंचे इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। इन जिलों में तेज हवाएं चल सकती है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 13-14 मार्च को पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश होगी। 15 मार्च से मैदान से लेकर पहाड़ तक बारिश की संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं चल सकती हैं। 16 मार्च को पहाड़ी जिलों में हल्की बारिश के साथ मौसम साफ होने की उम्मीद है।
