पश्चिम एशिया में जारी जंग ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कच्चे तेल और गैस की कमी से भारत जैसे देश बड़ी मात्रा में प्रभावित हुए हैं। हालांकि, होर्मुज के बंद होने का असर ईरान पर भी पड़ा है। यहां पर भी जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित हुई थी। अब तेहरान सरकार ने नया ऐलान करते हुए ईरानी बंदरगाहों पर जरूरी सामान लेकर आ रहे जहाजों को होर्मुज पार करने की इजाजत दे दी है।
ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक तेहरान सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान के ऊपर लगातार अमेरिका और इजरायल बम बरसा रहे हैं। तेहरान सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि ईरान के बंदरगाहों की तरफ आने वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत है। हालांकि, इन जहाजों को ईरान के संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत करनी होगी। इन जहाजों में ओमान की खाड़ी में मौजूद जहाज भी शामिल हैं।
बता दें, 28 फरवरी अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से ही तेहरान ने होर्मुज को पूरी तरह से बंद करके रखा है। उसी दिन से ईरान ने इस समुद्री रास्ते से केवल उन्हीं जहाजों को निकलने की इजाजत दी है, जो ईरान सरकार के सहयोगी हैं या फिर इस युद्ध में निष्पक्ष हैं। यूरोप समेत अमेरिका के तमाम सहयोगी देशों को जहाज अभी भी इस स्ट्रेट के दोनों तरफ फंसे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2000 से ज्यादा जहाज इस बंद से प्रभावित हुए हैं। पिछले एक महीने में भारत सरकार करीब 6 जहाज यहां से निकलवाने में कामयाब हुई है। अभी भी एक दर्जन जहाज स्ट्रेट के आस पास फंसे हुए हैं।
युद्ध की बात करें तो, कुछ दिनों में ईरान में सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाले अमेरिका और इजरायल इस वक्त फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। ईरान की तरफ से हल्के ड्रोन्स ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को इस युद्ध में झोंक दिया है। आलम यह है कि क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई हैं। ईरान के एयर डिफेंस को खत्म करने का दावा करने वाले अमेरिकी के हाल ही में दो फाइटर जेट धाराशाही हुए हैं। इसके अलावा कई और विमानों का नुकसान भी वाशिंगटन को उठाना पड़ा है।

