भारतीय ग्रामोत्थान संस्था , ढालवाला में आयोजित 14 दिवसीय जूट ब्रेडेड वर्क डिजाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज भव्य एवं सफल समापन हुआ। 20 अप्रैल 2026 से 03 मई 2026 तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जूट आधारित हस्तशिल्प के विभिन्न आयामों को सीखा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भारतीय ग्रामोत्थान संस्था द्वारा किया गया, जिसे राष्ट्रीय जूट बोर्ड, कोलकाता, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संचालित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना तथा पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जूट ब्रेडिंग, डिजाइनिंग, फिनिशिंग, उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता सुधार तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया, जिससे प्रतिभागी स्वयं अपने उत्पाद तैयार करने में सक्षम हो सकें। इस दौरान प्रतिभागियों ने बैग, डेकोरेटिव आइटम, होम डेकोर उत्पाद एवं दैनिक उपयोग की वस्तुएं तैयार कीं। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती रीना नौटियाल (डिप्टी मैनेजर एवं बैंक अधिकारी, एसबीआई बैंक ढालवाला) उपस्थित रहीं। उनके साथ संस्था की अध्यक्षा गीता चंदोला भी मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं। विशिष्ट अतिथियों में संस्था के PRO नरेंद्र प्रसाद कुकशाल, उत्तराखंड शिल्प रत्न विजेता बीना पुंडीर तथा संस्था के कर्मठ कार्यकर्ता राम सेवक रतूड़ी मौजूद रहे।
समारोह के दौरान प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। प्रदर्शनी में जूट से बने विभिन्न रचनात्मक एवं उपयोगी उत्पादों को देखकर अतिथियों ने प्रतिभागियों की सराहना की। मुख्य अतिथि श्रीमती रीना नौटियाल ने अपने संबोधन में कहा कि जूट आधारित हस्तशिल्प न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह स्वरोजगार के लिए एक सशक्त माध्यम भी बन सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वहीं संस्था की अध्यक्षा गीता चंदोला ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के बाद भी संस्था से जुड़े रहें, अपने कौशल को और विकसित करें तथा स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ें। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र के लोगों, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं आयोजकों ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे क्षेत्र के विकास एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।





