पश्चिम बंगाल में लगातार तीन बार से सत्ता संभाल रहीं ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को करारी हार मिली है। भाजपा ने डबल सेंचुरी लगाते हुए जीत हासिल की है। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 148 है और इस तरह भाजपा को यह बड़ी जीत मिली है। पार्टी अगले सालों तक बिना किसी आशंका के सरकार चला सकेगी। वहीं ममता बनर्जी ने सिर्फ बंगाल की सत्ता ही नहीं खोई है बल्कि उनकी कई उम्मीदों को झटका लगा है। टीएमसी की इस हार का असर दिल्ली तक होगा और ममता बनर्जी का कद भी घटेगा। 2024 से पहले और उसके बाद तक बीच-बीच ऐसी मांग उठती थी कि ममता बनर्जी को ही INDIA अलायंस की कमान सौंप दी जाए। अब इस पर लगाम लगेगी।
यदि वह अपने ही राज्य की सत्ता खो चुकी हैं तो फिर INDIA अलायंस का नेता बनने का ख्वाब भी पूरा होना मुश्किल है। यही नहीं उनके लिए पार्टी को पहले की तरह मजबूत बनाए रखना भी मुश्किल होगा। बंगाल की जैसी राजनीति है, उसमें संभावना है कि टीएमसी के कुछ जीते हुए विधायक और अन्य नेता भी पलटी मारते हुए भाजपा में ही चले जाएं। इन चुनाव नतीजों से राज्यसभा के समीकरण में भी बदलाव हो जाएगा और भाजपा की सीटों में इजाफा होगा। इ तरह विधानसभा इलेक्शन का रिजल्ट सीधे तौर पर संसद में भी असर डालेगा। यही नहीं 2029 के आम चुनाव में टीएमसी कितनी मजबूत रहेगी, यह भी देखना होगा।
बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद उसका तीसरा नंबर है। ऐसे में यदि उत्तर प्रदेश या अन्य किसी बड़े राज्य में भाजपा की ताकत कम होती है तो उसे बंगाल से बैलेंस करने का मौका मिलेगा। ममता बनर्जी की इस हार से विपक्ष सामूहिक तौर पर भले ही कमजोर हुआ है, लेकिन कांग्रेस को इससे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। वजह यह कि ममता बनर्जी अकसर कांग्रेस की लीडरशिप को ही टारगेट करती रही हैं। ऐसे में कांग्रेस ने केरल में जीत कर अपनी ताकत बढ़ाई है। अब उसका विपक्षी INDIA अलायंस में अपरहैंड रहेगा। वहीं अधीर रंजन चौधरी जैसे नेता फिर से सक्रिय हो सकते हैं।
अभिषेक बनर्जी के लिए भी पार्टी में मुश्किल होंगे हालात
एक अहम बात यह भी है कि टीएमसी में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर भी चर्चाएं चलती रही हैं। पार्टी में उनके बढ़ते दखल को लेकर एक असंतोष रहा है। ममता बनर्जी के करीबी नेता भी उनसे असहज रहे हैं। अब जब पार्टी हार गई है तो फिर इसका ठीकरा कहीं न कहीं अभिषेक के सिर भी कुछ लोग फोड़ना चाहेंगे। इस तरह ममता बनर्जी ने बंगाल में हार झेलकर कई चिंताओं को एक साथ बढ़ा लिया है। अहम बात यह है कि नंदीग्राम, सिंगूर और भंगार समेत तीनों ही ऐसे इलाकों में टीएमसी हारी है, जिन्हें कभी उसका गढ़ माना जाता था।

