देहरादून पैनेसिया अग्निकांड में 1 मौत और 4 की हालत गंभीर; 3 अस्पताल बंद कराए गए

देहरादून के पैनेसिया अस्पताल में लगी आग के बाद सुरक्षित निकाले गए मरीजों का शहर के अन्य अस्पतालों में उपचार जारी है। हादसे के बाद कैलाश अस्पताल में दस और कोरोनेशन अस्पताल में एक मरीज को भर्ती कराया गया था। इनमें से कैलाश अस्पताल में उपचाराधीन चार गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जबकि अन्य सात मरीजों की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। वहीं, राजधानी दून में मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। निजी अस्पताल में अग्निकांड के बाद आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की ओर से अस्पतालों की मनमानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।

सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने दोनों अस्पतालों से संपर्क कर भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य और मिल रहे इलाज की विस्तृत जानकारी ली। कैलाश अस्पताल के निदेशक पवन शर्मा एवं मैनेजर एडमिन सुमन बर्थवाल खुद मौके पर मौजूद रहकर लगातार मरीजों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग को पल-पल का अपडेट दे रही हैं। उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है।

बिना पंजीकरण तीन अस्पताल बंद कराए

गुरुवार को सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार की टीम ने शहर के छह निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। भारी खामियां मिलने पर बिना पंजीकरण के चल रहे तीन अस्पतालों को मौके पर ही बंद करा दिया गया, जबकि तीन पंजीकृत अस्पतालों में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी पर उन्हें नोटिस थमाया गया है।

एसीएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष नगर स्थित डॉ. रेनू बिष्ट विनायक हेल्थ केयर, जोगीवाला स्थित पाइल्स केयर हॉस्पिटल आयुष वेलनेस सेंटर और कारगी बंजारावाला रोड स्थित दून मेडिसिटी हॉस्पिटल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट के तहत पंजीकरण कराए बिना संचालित होते पाए गए। दून मेडिसिटी के पास फायर एनओसी भी नहीं थी। इन तीनों अवैध अस्पतालों को टीम ने तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया है।

लापरवाही पर नपे जा रहे अस्पताल

वहीं, रिस्पना पुल के पास स्थित करीब 50 बेड वाले पारस हॉस्पिटल ट्रॉमा एंड मार्फेंस में निरीक्षण के समय कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था, जबकि वहां एक मरीज भर्ती पाया गया। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मिले दो पुरुष स्टाफ नर्स भी उत्तराखंड पैरा चिकित्सा परिषद में पंजीकृत नहीं थे।

शिमला बाईपास स्थित हयात मेडिकल सेंटर और रिंग रोड स्थित 15 से 20 बेड वाले एमएस हॉस्पिटल में पंजीकरण तो था, लेकिन वहां भी प्रभारी चिकित्सक नदारद मिले। मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर डॉक्टरों के गायब रहने की इस घोर लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। तीनों अस्पतालों (पारस, हयात और एमएस) के प्रबंधकों को नोटिस जारी कर तीन कार्य दिवस के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। विभाग की इस औचक कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा ने कहा कि जांच लगातार जारी रहेगी।

दून अस्पताल में 24 डिग्री से नीचे नहीं चलेगा एसी

देहरादून। पैनेसिया अस्पताल में अग्निकांड के बाद दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। अस्पताल में बिजली के ओवरलोड और शॉर्ट-सर्किट के खतरे को कम करने के लिए अब एसी का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से नीचे न चलाने का सख्त फैसला लिया गया है।

दो दिन में फायर सेफ्टी का काम पूरा करने के निर्देश

गुरुवार को एमएस डॉ. आरएस बिष्ट की अगुवाई में ओटी इमरजेंसी बिल्डिंग में एक दिन की फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल की गई। वहीं, एमएस ने नई ओपीडी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी से जुड़े जो भी काम बचे हैं, उन्हें दो दिन के भीतर हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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