12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित समारोह में उत्तराखंड के हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों, शिल्पकारों एवं उद्यमियों को सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न श्रेणियों में चयनित प्रतिभाओं को पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर पर भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला को हथकरघा एवं ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए उद्यम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, संस्था से जुड़ी परमिला भट्ट को हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हथकरघा पुरस्कार प्रदान किया गया। दोनों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों सम्मान प्राप्त हुआ।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित बुनकरों और शिल्पकारों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प कला प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल पारंपरिक हुनर को संरक्षण मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने स्थानीय उत्पादों की खरीद को जनआंदोलन बनाने पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड के बुनकरों और शिल्पकारों द्वारा तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। इससे स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ प्रदेश की पारंपरिक कला को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी।

भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला को मिला उद्यम पुरस्कार संस्था द्वारा ग्रामीण आजीविका, कौशल विकास और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं, परमिला भट्ट को हथकरघा पुरस्कार मिलना उत्तराखंड की पारंपरिक बुनाई और स्थानीय महिला कारीगरों के हुनर को प्रोत्साहन देने वाला सम्मान है।
समारोह में उत्कृष्ट कारीगरों को राज्य शिल्प रत्न सहित विभिन्न पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बुनकरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों अनिल चंदोला और परमिला भट्ट को मिला यह सम्मान भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के साथ-साथ उत्तराखंड के हथकरघा एवं ग्रामीण उद्यमिता क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
