स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिज़ाइन के साथ जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित 25 दिवसीय डिजाइन एवं तकनीकी विकास कार्यशाला का सफल समापन हो गया है। ये कार्यशाला ढालवाला स्थित भारतीय ग्रामोत्थान संस्था में आयोजित की गई। यह विशेष कार्यशाला प्राकृतिक जैविक रेशा भीमल’ के माध्यम से उत्पाद निर्माण पर केंद्रित रही। इस कार्यशाला का नेतृत्व कार्यालय विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय नई दिल्ली से डिजाइनर श्रीमती कृतिका शर्मा और भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की मास्टर ट्रेनर श्रीमती बीना पुण्डीर द्वारा किया गया।

कार्यशाला में महिलाओं को बैग, टोपी, चप्पल जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने न केवल रचनात्मकता और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया, बल्कि तकनीकी दक्षता में भी उल्लेखनीय प्रगति दिखाई। स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करने की इस पहल को सभी ने सराहा।

यह प्रशिक्षण ‘वोकल फॉर लोकल’ और मेक इन इंडिया’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों के उद्देश्यों के साथ मेल खाता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। यह कार्यशाला प्रतिभागी महिलाओं के लिए न केवल एक प्रशिक्षण अवसर था, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन की ओर एक मजबूत कदम भी साबित हुआ।

समापन समारोह के अवसर पर उत्तराखंड राज्य पलायन निवारण आयोग से श्री एस. नेगी, उद्योग विभाग से सेवानिवृत्त श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, संस्था की अध्यक्षा श्रीमती गीता चंदोला तथा संस्था के प्रभारी श्री अनिल चंदोला उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने प्रतिभागी महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम का संचालन संस्था के जनसंपर्क अधिकारी श्री नरेन्द्र कुकशाल द्वारा किया गया।
