ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह से हिलाकर रख दिया है। यही कारण है कि हर देश जल्द से जल्द इस संघर्ष को समाप्त करने की बात कर रहे हैे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी युद्ध को शीघ्र खत्म करने के पक्ष में दिख रहे हैं। इसके पीछे एक ही कारण है, वह है युद्ध के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ना, जो अब नजर भी आने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की राष्ट्रीय औसत कीमत लगभग 4 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर पहुंच गई है, जो 2022 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। मोटर क्लब एएए ने बताया कि एक गैलन गैसोलीन की औसत कीमत अब करीब 4.02 डॉलर है, जो 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में एक डॉलर अधिक है। फरवरी के अंत से अब तक सामान्य गैसोलीन की औसत लागत में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
तेजी से बढ़ी हैं गैसोलीन की कीमतें
बताया जा रहा है कि अमेरिका और विश्व स्तर पर गैसोलीन की कीमतें अमेरिकी तथा इजरायली संयुक्त हमलों के बाद से तेजी से बढ़ी हैं। युद्ध के चलते तेल और गैस आपूर्ति में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो गया है। खाड़ी क्षेत्र में तेल स्थलों पर हुए हमलों के कारण कई देशों को उत्पादन रोकना पड़ा, जिससे वैश्विक आपूर्ति में भारी कटौती हुई। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में आखिरी बार इतना बड़ा उछाल 2022 में देखा गया था, जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था।
वहीं, पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में डीजल की औसत कीमत अब 5.42 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह 3.76 डॉलर प्रति गैलन थी। हालांकि राष्ट्रीय औसत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर बना हुआ है। मंगलवार को कैलिफोर्निया में सामान्य गैसोलीन की एक गैलन की औसत कीमत 5.89 डॉलर रही, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। वहीं, ओक्लाहोमा में यह कीमत औसतन 3.27 डॉलर पर सबसे कम रही।
युद्ध लंबा खिंचने पर और बढ़ सकती हैं कीमतें
वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लंबा खिंचता रहा तो कीमतें और भी ऊंचाई छू सकती हैं। दरअसल होर्मुज स्ट्रेट में आवागमन लगभग ठप पड़ गया है, जहां से विश्व के करीब एक-पांचवें हिस्से का तेल परिवहन होता है। ईरान की नाकाबंदी के कारण यह मार्ग प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, संघर्ष में शामिल पक्षों द्वारा तेल और गैस सुविधाओं पर किए जा रहे हमलों से उत्पादन लगातार बाधित हो रहा है। इसके अलावा, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी युद्ध में शामिल हो गए हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। हौथियों की भागीदारी के कारण लाल सागर मार्ग टैंकरों और व्यापारिक जहाजों के लिए जोखिम भरा बन गया है।
गौरलतब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान को बातचीत की मेज पर लौटने के लिए आमंत्रित करते हैं और उन्होंने 15 सूत्रीय शांति योजना का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता सहित पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के किसी भी ऊर्जा या बिजली संयंत्र पर हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो खार्ग द्वीप को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। विभिन्न विरोधाभासों के बीच रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका ने ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु स्थल इस्फहान को बंकर क्लस्टर बम से निशाना बनाया। हालांकि अमेरिकी पक्ष से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप ने कथित हमले का वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साझा किया है।

