ईरान की सत्ता पर हो गया कब्जा? ‘रियल पावर’ में IRGC, ‘साइडलाइन’ हो गए राष्ट्रपति पेजेशकियान

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में सत्ता संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की भूमिका तेजी से सीमित होती जा रही है, जबकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने प्रभावी रूप से देश की सत्ता पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी-इजरायली हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष नेताओं की मौत के बाद उत्पन्न राजनीतिक शून्य का फायदा उठाते हुए आईआरजीसी ने देश के दैनिक प्रशासन और महत्वपूर्ण फैसलों पर कब्जा जमा लिया है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि उदारवादी माने जाने वाले राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अब पूरी तरह से राजनीतिक गतिरोध में फंस गए हैं। आईआरजीसी ने राष्ट्रपति के कई महत्वपूर्ण फैसलों को रोक दिया है और सरकारी नियुक्तियों पर भी अपना वीटो लगा रही है।

मोजतबा खामेनेई को लेकर सस्पेंस बरकरार

युद्ध शुरू होने के कुछ दिनों बाद अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता के रूप में नामित किया गया था। हालांकि, उसके बाद से मोजतबा सार्वजनिक रूप से कहीं नहीं दिखे हैं और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उनके संदेश केवल लाइव टीवी पर पढ़े जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि मोजतबा की हालत गंभीर हो सकती है, जबकि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि उनका चेहरा ‘विकृत’ हो गया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि मोजतबा कोमा में हो सकते हैं। इस अनिश्चितता ने ईरान में गहरा राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। वहीं, मंगलवार को ईरान में रूस के राजदूत ने कहा कि मोजतबा तेहरान में ही हैं और सुरक्षा कारणों से नजर नहीं आ रहे हैं।

सैन्य परिषद के हाथ में सत्ता

ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, अब वरिष्ठ आईआरजीसी अधिकारियों से बनी एक ‘सैन्य परिषद’ देश के दैनिक निर्णय ले रही है। आईआरजीसी ने मोजतबा खामेनेई के चारों ओर कड़ी सुरक्षा घेरा बना रखा है और राष्ट्रपति समेत अन्य नेताओं को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सरकारी रिपोर्टें भी मोजतबा तक नहीं पहुंचाई जा रही हैं। पिछले सप्ताह राष्ट्रपति पेजेशकियान द्वारा हुसैन देहगान को खुफिया मंत्री नियुक्त करने का प्रयास आईआरजीसी के कमांडर अहमद वाहिदी के दबाव के बाद विफल हो गया। वाहिदी ने साफ कहा कि युद्ध के दौरान सभी संवेदनशील पदों पर नियुक्तियां सीधे आईआरजीसी द्वारा की जाएंगी।

राष्ट्रपति और आईआरजीसी में मतभेद

राष्ट्रपति पेजेशकियान आईआरजीसी की उस नीति से नाराज बताए जा रहे हैं जिसमें पड़ोसी खाड़ी देशों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा और ईरान की पहले से ही जर्जर अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह सकती है। 34 दिन से चल रहे युद्ध के कारण ईरान का गोला-बारूद लगभग खत्म हो चुका है और अर्थव्यवस्था पतन के कगार पर पहुंच गई है।

आईआरजीसी का बढ़ता दबदबा

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अर्धसैनिक बल के रूप में स्थापित आईआरजीसी पिछले कई दशकों से ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करती रही है। तेल, परिवहन, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इसका विशाल कारोबारी साम्राज्य है। वर्तमान में आईआरजीसी होर्मुज स्ट्रेट का प्रबंधन करने वाली एकमात्र संस्था भी है, जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान प्रभावी रूप से ‘बंद’ कर दिया है।

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